कोलकाता के तारातला इलाके में सोमवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब एक निर्माणाधीन गोदाम की विशाल छत अचानक भरभराकर गिर पड़ी। कुछ ही सेकंड में काम कर रहे मजदूरों की चीखें पूरे इलाके में गूंजने लगीं और लोहे, कंक्रीट व मलबे के नीचे दर्जनों लोग दब गए। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार हादसे में अब तक 3 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 18 से अधिक लोगों को घायल अवस्था में बाहर निकाला गया है। प्रशासन को आशंका है कि अभी भी 40 से 45 मजदूर मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं, जिसके चलते पूरे इलाके को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
तारातला हादसे के बाद रेस्क्यू अभियान
कैसे हुआ हादसा?
यह हादसा पश्चिम कोलकाता के तारातला थाना क्षेत्र स्थित ट्रांसपोर्ट डिपो रोड पर हुआ, जहां एक बड़े गोदाम का निर्माण कार्य चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोपहर के समय बड़ी संख्या में मजदूर साइट पर काम कर रहे थे। अचानक निर्माणाधीन ढांचे का एक बड़ा हिस्सा भरभराकर गिर गया और उसके साथ पूरी छत भी ध्वस्त हो गई। देखते ही देखते भारी कंक्रीट स्लैब और लोहे की बीमें मजदूरों पर गिर गईं। स्थानीय लोगों ने सबसे पहले राहत कार्य शुरू किया और कई लोगों को मलबे से बाहर निकालने का प्रयास किया। कुछ मजदूरों को गंभीर चोटों के साथ अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
अफरा-तफरी मच गई जब एक निर्माणाधीन गोदाम की विशाल छत अचानक भरभराकर गिर पड़ी।
सेना, NDRF और पुलिस ने संभाला मोर्चा
हादसे की गंभीरता को देखते हुए राज्य प्रशासन ने तत्काल बड़े स्तर पर बचाव अभियान शुरू किया। कोलकाता पुलिस, दमकल विभाग, सिविल डिफेंस, डिजास्टर मैनेजमेंट ग्रुप, SDRF और NDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं। हालात की गंभीरता को देखते हुए भारतीय सेना की ईस्टर्न कमांड की चार विशेष टुकड़ियों को भी रेस्क्यू ऑपरेशन में लगाया गया। सेना के इंजीनियर, मेडिकल स्टाफ और रेस्क्यू विशेषज्ञ भारी मशीनों और आधुनिक उपकरणों के साथ मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं। वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मौके पर मौजूद रहकर पूरे अभियान की निगरानी कर रहे हैं।
सीएम ने जताया दुख, प्रशासन ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
शुभेंदु अधिकारी ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया
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पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और घायलों के इलाज में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी। उन्होंने बताया कि बचाव कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है और सभी एजेंसियां मिलकर फंसे मजदूरों को सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रही हैं। घटना के बाद नबान्न में आपदा प्रबंधन नियंत्रण कक्ष सक्रिय कर दिया गया है और हेल्पलाइन नंबर 1070, 8697981070, 033-22143526 और 033-22535185 जारी किए गए हैं ताकि परिजन अपने लोगों की जानकारी प्राप्त कर सकें।
सबसे बड़ा सवाल: सुरक्षा मानकों में कहां हुई चूक?
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर निर्माणाधीन परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, तकनीकी खामी या लापरवाही इस दुर्घटना की वजह बनी। कोलकाता नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी और इंजीनियरिंग विशेषज्ञ भी मौके पर पहुंच चुके हैं। प्रशासन ने हादसे की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। फिलहाल पूरे राज्य की निगाहें रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हैं, क्योंकि मलबे के नीचे दबे मजदूरों को सुरक्षित निकालना सबसे बड़ी प्राथमिकता बना हुआ है।
