
छात्र प्रदर्शन पर सुझाव देतीं पूर्व IPS किरण बेदी।Source : Chrome
देशभर में छात्रों के जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने प्रदर्शन से निपटने को लेकर अपना सुझाव साझा किया है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान सबसे पहले सिविल डिफेंस की प्रशिक्षित टीमों को तैनात किया जाना चाहिए, जबकि दंगा-रोधी पुलिस को केवल आपात स्थिति में ही हस्तक्षेप करना चाहिए।
सोशल मीडिया के जरिए रखा सुझाव
किरण बेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी राय साझा करते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली पुलिस को टैग किया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब नीट पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर समेत कई जगहों पर छात्र प्रदर्शन जारी हैं।
सिविल डिफेंस को पहली पंक्ति में रखने की वकालत
पूर्व आईपीएस अधिकारी का मानना है कि विरोध-प्रदर्शनों के दौरान सबसे पहले सिविल डिफेंस के प्रशिक्षित कर्मियों को मैदान में उतारा जाना चाहिए। उनके अनुसार इससे प्रदर्शनकारियों और हथियारबंद पुलिस के बीच सीधे टकराव की संभावना कम होगी और हालात को अधिक शांतिपूर्ण तरीके से संभाला जा सकेगा।
BSF मॉडल का दिया उदाहरण
किरण बेदी ने कहा कि जिस तरह सीमाओं पर सेना से पहले सीमा सुरक्षा बल (BSF) पहली सुरक्षा पंक्ति के रूप में काम करती है, उसी तरह प्रदर्शन के दौरान भी सिविल डिफेंस को अग्रिम मोर्चे पर रखा जा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्यों में पहले से मौजूद सिविल डिफेंस तंत्र को और बेहतर प्रशिक्षण दिया जाए।
रायट पुलिस की भूमिका भी बताई
उन्होंने कहा कि रायट पुलिस को सीधे प्रदर्शनकारियों के सामने नहीं आना चाहिए। उसकी भूमिका सिविल डिफेंस की सुरक्षा सुनिश्चित करने और स्थिति पर नजर रखने की होनी चाहिए। यदि हालात नियंत्रण से बाहर हो जाएं या सिविल डिफेंस कर्मियों की सुरक्षा खतरे में पड़े, तभी दंगा-रोधी पुलिस को सक्रिय किया जाए।
शांतिपूर्ण समाधान पर दिया जोर
किरण बेदी का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था अपनाने से कानून-व्यवस्था भी बनी रहेगी और प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षा बलों के बीच अनावश्यक टकराव से भी बचा जा सकेगा। उनके मुताबिक संवाद और संयम किसी भी लोकतांत्रिक विरोध से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका है।
