सोनिया गांधी। | Source: Chrome

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देशभर में नीट पेपर लीक और छात्र आंदोलनों के बीच कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों पर तीखा हमला बोला है। एक लेख के जरिए उन्होंने शिक्षा बजट में कटौती, निजीकरण, पेपर लीक और युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी को लेकर सरकार को घेरा और छात्रों की मांगों पर संवाद की जरूरत बताई।

शिक्षा व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल

सोनिया गांधी ने अपने लेख में कहा कि पिछले कुछ सप्ताह से देशभर के छात्र परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार ने छात्रों की बात सुनने के बजाय आंदोलन को बल प्रयोग से दबाने की कोशिश की।

शिक्षा बजट और निजीकरण को बताया चिंता का विषय

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरकार लगातार स्कूली और उच्च शिक्षा के बजट में कटौती कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी शिक्षण संस्थानों की अनदेखी कर निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे शिक्षा आम परिवारों की पहुंच से दूर होती जा रही है।

NTA और पेपर लीक पर सरकार को घेरा

सोनिया गांधी ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि परीक्षा प्रणाली के अत्यधिक केंद्रीकरण और निजी एजेंसियों पर निर्भरता के कारण पेपर लीक जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

बेरोजगारी और विश्वविद्यालयों की स्थिति पर चिंता

उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है। साथ ही विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों को लेकर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हुई है।

छात्रों के समर्थन में कांग्रेस।

सोनिया गांधी ने कहा कि छात्रों के हितों की रक्षा करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई उचित नहीं थी और सरकार को विरोध कर रहे युवाओं से संवाद स्थापित करना चाहिए।

पुरानी घटनाओं का भी किया जिक्र

अपने लेख में सोनिया गांधी ने सीएए-एनआरसी विरोध प्रदर्शन और महिला पहलवानों के आंदोलन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार को असहमति की आवाज को दबाने के बजाय लोकतांत्रिक तरीके से समाधान तलाशना चाहिए।