डुमरांव, बक्सर: ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण के सरकारी दावे तब खोखले साबित होते नजर आते हैं, जब धरातल पर बनी योजनाओं की हकीकत सामने आती है। जिले के डुमरांव प्रखंड की सोवां पंचायत में मनरेगा मद से लाखों रुपये की लागत से बना 'जीविका भवन' आज बदहाली का शिकार है। निर्माण के बाद से ही यह भवन ताले में बंद है और देखरेख के अभाव में खंडहर में तब्दील होने की कगार पर पहुंच गया है।
लाखों की लागत से बना जीविका भवन खंडहर में तब्दीलSource : Social Media
कागजों पर योजना, ज़मीन पर सन्नाटा
सरकार ने गांवों के विकास और जीविका समूह की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से पंचायत स्तर पर जीविका भवन का निर्माण कराया था। ताकि यहां बैठकें और अन्य गतिविधियां संचालित हो सकें। लेकिन विभागीय अधिकारियों और कर्मियों की लापरवाही के कारण यह भवन शुरू होने से पहले ही बंद हो गया।
ग्रामीणों का कहना है कि न तो यहां कोई बैठक होती है और न ही किसी जीविका दीदी को इसका लाभ मिल पा रहा है।
असामाजिक तत्वों ने तोड़े खिड़की-दरवाजे
सुरक्षा और निगरानी के अभाव में यह भवन असामाजिक तत्वों का निशाना बन गया है। बंद पड़े भवन की सुध लेने वाला कोई नहीं है। इसका फायदा उठाकर उपद्रवियों ने पत्थरों और ईंटों से हमला कर इसकी खिड़कियों, दरवाजों और ग्रिल को क्षतिग्रस्त कर दिया है। भवन के शीशे भी टूट चुके हैं। सरकारी धन की इस तरह बर्बादी साफ देखी जा सकती है।
ग्रामीणों में आक्रोश, जांच की मांग*
जनता के टैक्स के पैसे से बनी संपत्ति को इस तरह बर्बाद होते देख स्थानीय लोगों में आक्रोश है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब भवन का उपयोग ही नहीं करना था, तो लाखों रुपये खर्च करने का औचित्य क्या था?
स्थानीय बुद्धिजीवियों और जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही भवन को अविलंब चालू कराया जाए और इसे नुकसान पहुंचाने वाले असामाजिक तत्वों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में सरकारी संपत्ति को इस तरह बर्बाद होने से बचाया जा सके।
