ग्लासगो। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के नौवें दिन भारत के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश की झोली में दो स्वर्ण पदक डाल दिए। सबसे पहले महिला जूडो की 48 किलोग्राम स्पर्धा में अस्मिता डे ने कनाडा की हेइडी क्वाच को हराकर स्वर्ण पदक जीता। इसके लगभग आधे घंटे बाद पुरुष 60 किलोग्राम वर्ग में हर्ष सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ काट्ज को पराजित कर इतिहास रच दिया। हर्ष कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो की पुरुष स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के पहले खिलाड़ी बन गए हैं।
अस्मिता डे ने दिलाया दिन का पहला स्वर्ण
भारत के लिए दिन की शुरुआत बेहद यादगार रही। महिला 48 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में अस्मिता डे ने कनाडा की हेइडी क्वाच को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस जीत के साथ उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जूडो में भारत का पहला पदक भी दिलाया।
अस्मिता ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार खेल दिखाया। सेमीफाइनल में उन्होंने स्कॉटलैंड की समर शॉ को 'युको' के आधार पर हराकर फाइनल का टिकट हासिल किया। मुकाबले के दौरान एक समय वह हार के करीब पहुंच गई थीं, लेकिन शानदार वापसी करते हुए जीत दर्ज की। इससे पहले क्वार्टर फाइनल में उन्होंने स्कॉटलैंड की ईवा इविंग को 'इप्पोन' के जरिए हराकर अंतिम चार में जगह बनाई थी।
हर्ष सिंह ने रच दिया भारतीय जूडो का नया इतिहास
अस्मिता की सफलता के कुछ ही समय बाद भारत को दूसरा स्वर्ण पदक भी मिल गया। पुरुष 60 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में हर्ष सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ काट्ज को हराकर स्वर्ण पदक जीत लिया। इस जीत के साथ उन्होंने भारतीय खेल इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया।
हर्ष कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो की पुरुष स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। उनकी इस उपलब्धि को भारतीय जूडो के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है।
फाइनल तक का सफर भी रहा शानदार
हर्ष सिंह ने पूरे टूर्नामेंट में लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन किया। उन्होंने मलावी के चिकोंडी काथेवेरा को 'इप्पोन' से हराकर अपने अभियान की शुरुआत की। इसके बाद वानुआतु के एलन मोंथुएल को हराकर सेमीफाइनल में पहुंचे।
सेमीफाइनल में उनका मुकाबला ऑस्ट्रेलिया के पेड्रो कार्लोस एंटुन नेटो से हुआ, जहां उन्होंने 'वाजा-आरी' के आधार पर जीत दर्ज की और फाइनल में प्रवेश किया। खिताबी मुकाबले में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ काट्ज को हराकर भारत को स्वर्ण पदक दिलाया।
भारत के खाते में पहुंचा छठा स्वर्ण पदक
हर्ष सिंह की जीत के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या छह हो गई। नौवें दिन जूडो में लगातार दो स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय दल ने पदक तालिका में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली।
यामिनी मौर्य से भी स्वर्ण पदक की उम्मीद
महिला जूडो में भारत की एक और खिलाड़ी यामिनी मौर्य ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में जगह बना ली है। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की डोने ब्रेटेनबाख को 'इप्पोन' से हराकर खिताबी मुकाबले का टिकट हासिल किया।
इससे पहले यामिनी ने घाना की फ्रेमा अग्येई को हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया था। अब स्वर्ण पदक के मुकाबले में उनका सामना इंग्लैंड की असेल्या टोपराक से होगा। उनका फाइनल मुकाबला रात 10:20 बजे निर्धारित है।
नीरज चोपड़ा पर भी टिकी हैं करोड़ों भारतीयों की निगाहें
कॉमनवेल्थ गेम्स के नौवें दिन भारतीय खेल प्रेमियों की नजरें स्टार भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा पर भी टिकी हुई हैं। नीरज का फाइनल मुकाबला रात 12:45 बजे खेला जाएगा। उनसे भी भारत को स्वर्ण पदक की बड़ी उम्मीद है।
श्रद्धा कदुबाल चोपड़े का अभियान हुआ समाप्त
महिला 52 किलोग्राम वर्ग में श्रद्धा कदुबाल चोपड़े पदक की दौड़ से बाहर हो गईं। रेपेचेज मुकाबले में उन्हें वेल्स की लोला हॉडसन ने 'युको' के आधार पर पराजित किया।
इससे पहले श्रद्धा ने सिएरा लियोन की जेन मासाक्वॉई को 'इप्पोन' से हराकर शानदार शुरुआत की थी, लेकिन क्वार्टर फाइनल में ऑस्ट्रेलिया की टिंका ईस्टन के खिलाफ उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
रोहित बसीर मजगुल भी पदक से चूके
पुरुष 66 किलोग्राम वर्ग में भारत के रोहित बसीर मजगुल का अभियान भी समाप्त हो गया। रेपेचेज मुकाबले में उन्हें इंग्लैंड के माइकल फ्रायर ने 'युको' के आधार पर हराया।
रोहित ने शुरुआती दौर में मोजाम्बिक के सैमुअल रिबेरो को हराया था, लेकिन क्वार्टर फाइनल में साइप्रस के पेट्रोस क्रिस्टोडुलिडेस के खिलाफ हारने के बाद उन्हें रेपेचेज का सहारा लेना पड़ा, जहां उनका सफर समाप्त हो गया।
जूडो के स्कोरिंग सिस्टम को समझिए
जूडो में 'इप्पोन' सर्वोच्च स्कोर माना जाता है। किसी खिलाड़ी को इप्पोन मिलते ही मुकाबला तुरंत समाप्त हो जाता है। 'वाजा-आरी' दूसरा सबसे बड़ा स्कोर होता है, जबकि 'युको' अपेक्षाकृत कम अंक वाला स्कोर है, जो मुकाबले में बढ़त दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
