विपक्षी गठबंधन ने एक बार फिर लोकतंत्र खतरे में होने का दावा करते हुए मोदी सरकार और चुनाव आयोग पर बड़ा आरोप लगाया है। इस बार विपक्ष ने सीधे भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को पत्र लिखकर स्पेशल समरी रिविजन (SIR) प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि SIR विधानसभा चुनाव से पांच साल पहले किया जाना चाहिए।

EVM और SIR पर उठाए सवाल

विपक्ष ने EVM पर भी सवाल उठाते हुए बैलेट पेपर व्यवस्था को फिर से लागू करने पर गंभीरता से विचार करने की मांग की है। गठबंधन ने आरोप लगाया कि दिल्ली, महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनावों में हेराफेरी की गई थी। INDIA गठबंधन ने CJI को 28 जून को लिखे पत्र में कहा कि वे उन्हें पत्र नहीं लिखते, लेकिन हालात ने उन्हें ऐसा करने पर मजबूर कर दिया। गठबंधन ने कहा कि BJP को फायदा पहुंचाने के लिए SIR, चुनावों में हेराफेरी के लिए एजेंसियों का दुरुपयोग और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जा रहा है। गठबंधन ने यह भी कहा कि सरकार के साथ बातचीत से कोई समाधान नहीं निकल पा रहा है।

अगर अदालतें भी नाकाम हो जाएं तो किसके पास जाएं?

पत्र में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने मई में SIR प्रक्रिया को संवैधानिक आवश्यकता बताते हुए सही ठहराया था। इसके बावजूद 24 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय सांसद के गठबंधन ने CJI से इस मामले में हस्तक्षेप की अपील की है। गठबंधन ने लिखा कि जब संस्थागत व्यवस्थाएं पूरी तरह नाकाम हो जाती हैं, तो लोकतंत्र अराजकता में बदल जाता है। उन्होंने कहा कि वे न्यायपालिका पर सवाल नहीं उठा रहे हैं, बल्कि जब सभी व्यवस्थाएं विफल हो जाती हैं तो लोग अदालत का रुख करते हैं। यदि अदालतें भी राहत न दें, तो फिर न्याय के लिए किसके पास जाया जाए, यह बड़ा सवाल है।

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी उठाए सवाल

विपक्षी गठबंधन ने आरोप लगाया कि BJP के शासन में चुनावी गड़बड़ी की शुरुआत चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से ही हो जाती है। पत्र में कहा गया कि अनूप बरनवाल मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विपरीत सरकार ने चुनाव आयुक्तों के चयन करने वाले कॉलेजियम से CJI को हटा दिया और ऐसे लोगों की नियुक्ति की, जो सरकार से करीबी तौर पर जुड़े हुए हैं।

गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञान कुमार और चुनाव आयोग के रवैये पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान BJP का खुला समर्थन किया गया। विपक्ष ने SIR प्रक्रिया को चुनावी व्यवस्था पर सबसे बड़ा प्रहार बताते हुए इस पर रोक लगाने की मांग दोहराई।