erer | Source: ereनई दिल्ली: सफलता कभी भी संसाधनों की मोहताज नहीं होती, बल्कि यह पक्के इरादों और बुलंद हौसलों से तय होती है। उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर के रहने वाले विपिन देव यादव की कहानी इसी बात का जीता-जागता सबूत है। उनके पिता कोतवाली में एक चौकीदार के रूप में काम करते हैं। आर्थिक तंगी और गरीबी के तमाम तानों के बीच पले-बढ़े विपिन ने न केवल खुद अपनी तकदीर बदली, बल्कि समाज के कई अन्य जरूरतमंद छात्रों के सपनों को भी नई उड़ान दी है।

परिवार का त्याग और दिल्ली की महंगी कोचिंग से दूरी

विपिन के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी, लेकिन उनके माता-पिता और भाई के हौसले आसमान छू रहे थे। भाई का सपना था कि घर में कोई आईएएस अधिकारी बने, जिसके लिए उसने अपनी पढ़ाई तक छोड़ दी थी। परिवार ने मां की एफडी (FD) तुड़वाकर और किसान क्रेडिट कार्ड से कर्ज लेकर विपिन को दिल्ली भेजा था। हालांकि, दिल्ली पहुंचने के कुछ महीनों बाद ही विपिन को अहसास हुआ कि बड़ी और महंगी कोचिंग संस्थाएं उनके लिए मुफीद नहीं हैं। उन्होंने बिना समय गंवाए कोचिंग छोड़ने का साहसिक फैसला किया और पूरी तरह से सेल्फ-स्टडी पर भरोसा जताया।

असफलताओं से सीख और खुद की रणनीति

विपिन का सफर आसान नहीं था। उन्हें कई बार असफलताओं का सामना करना पड़ा। यूपीएससी और यूपीपीएससी की मुख्य परीक्षाओं तथा इंटरव्यू तक पहुंचने के बावजूद कई बार फाइनल लिस्ट में नाम न आना उनके लिए मानसिक रूप से बेहद कठिन था। लोगों के ताने और असफलता का तनाव अक्सर उन्हें परेशान करता था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी रणनीतियों में बदलाव करते हुए, ऑप्शनल सब्जेक्ट बदला और लाइब्रेरी में घंटों की कड़ी मेहनत के दम पर आखिरकार UPSC 2025 में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 316 हासिल कर इतिहास रच दिया।

दूसरों के लिए मसीहा बने, 15 से ज्यादा छात्रों का संवारा भविष्य

  1. अपनी सफलता के सफर में खुद तमाम कठिनाइयों का सामना करने वाले विपिन ने समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को कभी नहीं भुलाया। उन्होंने लखनऊ के भागीदारी भवन में जरूरतमंद छात्रों को मुफ्त में पढ़ाना शुरू किया था। संसाधनों की कमी का दर्द वे अच्छी तरह समझते थे, यही वजह है कि उनके अनमोल मार्गदर्शन और पढ़ाने के तरीके से प्रेरित होकर 15 से अधिक छात्रों ने UPPSC 2024 में शानदार सफलता हासिल की। आज विपिन न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत बन चुके हैं।