रेहान फ़ज़ल 

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के एक बयान ने एक बार फिर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान में हर नागरिक को समान अवसर मिलता है, चाहे उसका धर्म, पहनावा या पहचान कुछ भी हो। इसी संदर्भ में उन्होंने टिप्पणी की कि “एक दिन हिजाब पहनने वाली बेटी भी भारत की प्रधानमंत्री बन सकती है।" ओवैसी ने यह बात भारत और पाकिस्तान की संवैधानिक व्यवस्थाओं की तुलना करते हुए कही। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान सभी नागरिकों को बराबरी का अधिकार देता है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।

उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है। समर्थकों का कहना है कि यह बयान समावेशिता और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करता है, जबकि आलोचक इसे राजनीतिक बयानबाजी के रूप में देख रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान देश में समान अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता और लोकतंत्र को लेकर चल रही बहस को और धार देता है।