हरिद्वार नगर निगम के चर्चित भूमि खरीद घोटाले में धामी सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए तत्कालीन नगर आयुक्त और आईएएस अधिकारी वरुण चौधरी की बर्खास्तगी की सिफारिश कर दी है। जांच में खुलासा हुआ है कि करीब 14 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन को 54 करोड़ रुपये में खरीदा गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा। मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह और एसडीएम अजयवीर सिंह समेत कई अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर हुई जांच के बाद सरकार ने साफ संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार और नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगी।

Bji | Source: Aaj Tak

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DoPT को भेजा गया मामला, कई अधिकारियों पर गिरी गाज

सरकार ने पूरे मामले को आगे की कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को भेजने का फैसला किया है। इसके साथ ही घोटाले से जुड़े 10 अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है यह मामला अप्रैल 2025 में सामने आए हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद घोटाले से जुड़ा है। आरोप है कि नगर निगम ने लगभग 14 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन को 54 करोड़ रुपये में खरीदा, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा।

जांच रिपोर्ट में सामने आईं कई अनियमितताएं

मामला उजागर होने के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह, नगर निगम आयुक्त वरुण चौधरी और एसडीएम अजयवीर सिंह को पहले ही निलंबित किया जा चुका था। उत्तराखंड के प्रशासनिक इतिहास में यह पहला मामला माना जा रहा है, जिसमें डीएम, नगर आयुक्त और एसडीएम को एक साथ निलंबित किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर इस मामले की जांच सचिव रणवीर चौहान को सौंपी गई थी। उन्होंने हरिद्वार पहुंचकर विस्तृत जांच की और करीब 100 पन्नों की रिपोर्ट शासन को सौंपी। इसी रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।

जांच में पाया गया कि भूमि खरीद प्रक्रिया में कई गंभीर अनियमितताएं हुईं। रिपोर्ट के अनुसार, भूमि का मूल्यांकन पहले कृषि भूमि के रूप में किया गया, लेकिन बाद में उसे वाणिज्यिक दरों पर खरीदा गया। साथ ही भूमि खरीद के लिए आवश्यक लैंड कमेटी का गठन भी नहीं किया गया और कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को दरकिनार कर निर्णय लिए गए।

नियमों की अनदेखी कर पूरी की गई प्रक्रिया

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि धारा 143 की पूरी प्रक्रिया महज दो से तीन दिनों में पूरी कर दी गई, जो सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के विपरीत है। जांच के दौरान यह भी पता चला कि तत्कालीन एसडीएम ने फाइल को तेजी से निपटाने के लिए अपने स्टेनो को ही राजस्व अभिमत देने का कार्य सौंप दिया था, जो नियमों के खिलाफ था।

इसके अलावा खरीदी गई जमीन कूड़े के ढेर के पास स्थित थी और उसकी तत्काल कोई आवश्यकता भी नहीं थी। इसके बावजूद सर्किल रेट के आधार पर जमीन खरीदने की प्रक्रिया पूरी की गई। सरकार इस मामले में पहले ही दो आईएएस और एक पीसीएस अधिकारी समेत कुल 12 अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित कर चुकी है। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक मुकदमे दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी धन के दुरुपयोग या नियमों की अनदेखी करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।