समाजवादी पार्टी में टूट का लगातार दावा करने वाले उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अब अपनी ही पार्टी के कुछ विधायकों को समाजवादी पार्टी का बताया है। गाजीपुर में बातचीत के दौरान उन्होंने अपने ही विधायक पर आरोप लगाया और अखिलेश यादव पर तीखा अंदाज में कहा
"हमारी पार्टी सुभासपा के विधायक दरअसल हमारे थे ही नहीं। गठबंधन के दौरान अखिलेश यादव ने शर्त रखी थी कि समझौता तभी होगा, जब उनके 12 प्रत्याशी हमारे चुनाव चिह्न पर लड़ेंगे। मऊ से विधायक अब्बास अंसारी भी उनमें से एक हैं"।

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गठबंधन की शर्त पर सपा प्रत्याशियों को मिला था टिकट
ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि सपा के साथ गठबंधन के दौरान अखिलेश यादव ने शर्त रखी थी कि समझौता तभी होगा, जब उनके 12 उम्मीदवार सुभासपा के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने दावा किया कि मऊ सदर से विधायक अब्बास अंसारी भी उन्हीं उम्मीदवारों में शामिल थे। राजभर के अनुसार, अब्बास अंसारी पहले से ही समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे हैं और सपा का झंडा लगाकर घूमते थे, इसलिए उनके पार्टी छोड़ने या टूट की चर्चा का कोई आधार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा सत्र शुरू होने से पहले समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट देखने को मिलेगी।
टिकट के बदले पैसे लेने के आरोपों पर दी चुनौती
अखिलेश यादव द्वारा टिकट के बदले पैसे लेने के लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए राजभर ने कहा कि यदि आरोपों में सच्चाई है तो कोई एक व्यक्ति सामने लाकर खड़ा कर दिया जाए। उन्होंने दावा किया कि 2022 में सपा में रहने के दौरान उन्होंने पार्टी के अंदर होने वाली गतिविधियों को करीब से देखा है और उनके पास कई जानकारियां मौजूद हैं। राजभर ने कहा कि समय आने पर वह सबूतों के साथ कई तथ्यों को सार्वजनिक करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने आज तक अखिलेश यादव की एक चाय तक नहीं पी है और यदि उनमें हिम्मत है तो किसी भी विधायक से इस बारे में पूछ सकते हैं।
राजीव राय और सपा पर भी साधा निशाना
मऊ के सपा सांसद राजीव राय और ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के बीच हुए विवाद पर टिप्पणी करते हुए राजभर ने कहा कि एके शर्मा एक शिक्षित और अनुभवी व्यक्ति हैं, जबकि राजीव राय की भाषा किसी जनप्रतिनिधि के अनुरूप नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजीव राय केवल अखिलेश यादव की बदौलत सांसद बने हैं और उनकी अपनी कोई राजनीतिक ताकत नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि राजीव राय पर कई यादव परिवारों की जमीन कब्जाने के आरोप हैं, जिनसे जुड़े मामले अदालतों में लंबित हैं।
राम मंदिर दान विवाद पर भी उठाए सवाल
अयोध्या राम मंदिर में दान चोरी के कथित मामले का जिक्र करते हुए राजभर ने कहा कि इस मुद्दे को सबसे पहले अखिलेश यादव ने उठाया था। उन्होंने सवाल किया कि उन्हें इसकी जानकारी सबसे पहले कैसे मिली। राजभर ने दावा किया कि जांच के दौरान सबसे पहले टीनू यादव का नाम सामने आया और इसी आधार पर उन्होंने पूरे मामले को लेकर सवाल खड़े किए। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान माफिया और अपराधियों को संरक्षण मिलता था, जबकि वर्तमान सरकार में ऐसे तत्वों पर कार्रवाई की गई है।
