जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन पर बयान देते यूपी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर। | Source: Chrome

जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन पर बयान देते यूपी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर।Source : Chrome

दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने विपक्षी दलों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक रंग दिया गया। उन्होंने दावा किया कि युवाओं को गुमराह कर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया।

छात्र आंदोलन को लेकर विपक्ष पर साधा निशाना

एक बातचीत के दौरान ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि जंतर-मंतर पर हुआ प्रदर्शन छात्रों का था, लेकिन वहां कई विपक्षी नेता भी मौजूद थे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आंदोलन पूरी तरह छात्रों का था, तो उसमें राजनीतिक नेताओं की भूमिका क्या थी। उनके मुताबिक, आंदोलन की आड़ में राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की गई।

'युवाओं का भविष्य दांव पर लगाया गया'

राजभर ने आरोप लगाया कि छात्रों को भड़काकर ऐसे आंदोलन में शामिल किया गया, जिसके बाद कई युवाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हुई। उन्होंने कहा कि जिन छात्रों पर मुकदमे दर्ज हुए हैं, उनके भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा। उनका कहना था कि किसी भी लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन में कानून का पालन होना चाहिए और हिंसा का कोई स्थान नहीं है।

अखिलेश यादव और केजरीवाल पर भी हमला

राजभर ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार छात्रों के मुद्दों को राजनीतिक रूप देने की कोशिश कर रहा है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों से उनके खिलाफ भी सुनियोजित तरीके से बयानबाजी कराई जा रही है।

सोशल मीडिया पोस्ट में लगाए कई आरोप

राजभर ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने कुछ विपक्षी नेताओं के आचरण और कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जनप्रतिनिधियों के नाम आपराधिक मामलों और जमीन कब्जाने जैसी शिकायतों से जुड़े रहे हैं। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित नेताओं की ओर से प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

दलित-पिछड़ों के मुद्दे पर मांगा जवाब

राजभर ने कहा कि जो दल सामाजिक न्याय की बात करते हैं, उन्हें दलितों और पिछड़े वर्ग के हितों की रक्षा भी करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि गंभीर शिकायतों के बावजूद कुछ मामलों में कार्रवाई नहीं होती। इसी आधार पर उन्होंने विपक्षी नेताओं से सार्वजनिक रूप से जवाब देने की मांग की।