पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि वह 16 अगस्त को पटना के गर्दनीबाग में भूख हड़ताल पर बैठेंगे। पप्पू यादव ने यह घोषणा 14 अगस्त को हाजीपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान की। उन्होंने बताया कि इस आंदोलन के पीछे छात्रों की मांगों के साथ-साथ बिहार में बढ़ते अपराध और दूसरे कई मुद्दे हैं।
पप्पू यादव का कहना है कि बिहार के छात्र और युवा अपनी समस्याओं को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं। ऐसे में वह उनके साथ खड़े रहेंगे। खास तौर पर शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मामलों को लेकर वह सरकार पर दबाव बनाना चाहते हैं।
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से पटना के गर्दनीबाग में शोधार्थी और छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें सहायक प्राध्यापक की बहाली में नियमों को लेकर बदलाव, डोमिसाइल नीति, अधिकतम उम्र सीमा और गेस्ट फैकल्टी से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। पप्पू यादव हाल ही में इन प्रदर्शन कर रहे शोधार्थियों के बीच भी पहुंचे थे।
शोधार्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उनका आंदोलन कई दिनों से चल रहा है। पप्पू यादव ने इसी आंदोलन को समर्थन देते हुए 16 अगस्त को खुद उपवास करने का फैसला लिया है।
सांसद ने सिर्फ छात्रों के मुद्दे को ही आंदोलन का आधार नहीं बनाया है। उन्होंने बिहार में बढ़ते अपराध और लगातार हो रही हत्याओं को लेकर भी सरकार को घेरा है। उनका कहना है कि राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर लोगों के बीच चिंता बढ़ रही है और इस मुद्दे पर सरकार को जवाब देना चाहिए।
इसके अलावा पप्पू यादव ने BPSC से जुड़े मामलों को भी अपने आंदोलन में शामिल किया है। वह शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं से जुड़े दूसरे मुद्दों को लेकर भी आवाज उठाने की बात कह रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वह हिंदी और अंग्रेजी के इस्तेमाल से जुड़े एक मुद्दे पर भी विरोध जता रहे हैं।
पप्पू यादव के इस ऐलान के बाद अब निगाहें 16 अगस्त के आंदोलन पर टिक गई हैं। खास बात यह है कि गर्दनीबाग पहले से ही छात्रों और अलग-अलग संगठनों के धरना-प्रदर्शन का प्रमुख स्थान बना हुआ है। ऐसे में सांसद के खुद भूख हड़ताल पर बैठने से आंदोलन को राजनीतिक समर्थन मिलने की संभावना है।
पप्पू यादव इससे पहले भी छात्रों और युवाओं के मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ खुलकर बोलते रहे हैं। इस बार उन्होंने सीधे आंदोलन में शामिल होने का फैसला किया है। उनका कहना है कि जब तक युवाओं और छात्रों की समस्याओं पर गंभीरता से बात नहीं होगी, तब तक उनकी आवाज उठती रहेगी।
वहीं, बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह के आंदोलनों का राजनीतिक असर भी देखा जा सकता है। हालांकि पप्पू यादव ने अपने इस कदम को छात्रों और आम लोगों के मुद्दों से जोड़कर बताया है।
अब देखना होगा कि 16 अगस्त को गर्दनीबाग में पप्पू यादव की भूख हड़ताल कितनी बड़ी होती है और सरकार की तरफ से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है। फिलहाल उनके ऐलान के बाद बिहार की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
