
Source: Pinterest
कई लोगों को कभी-कभी साफ़ आसमान, सफ़ेद दीवार, या मोबाइल या लैपटॉप स्क्रीन को देखते समय अपनी आँखों के सामने छोटे काले धब्बे, धागे जैसे निशान, या मकड़ी के जाले जैसी आकृतियाँ तैरती हुई दिखती हैं। इन्हें "आई फ्लोटर्स" के नाम से जाना जाता है। ज़्यादातर मामलों में, ये नुकसान नहीं पहुँचाते और उम्र बढ़ने के साथ दिखाई देते हैं; हालाँकि, इनकी संख्या में अचानक बढ़ोतरी या एक साथ रोशनी की चमक का अनुभव आँखों की किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, कम उम्र के लोगों में भी आई फ्लोटर्स के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं, जिसमें मायोपिया (नज़दीकी नज़र) का बढ़ना और डिजिटल स्क्रीन का लंबे समय तक इस्तेमाल इसके मुख्य कारण बताए गए हैं।
आँखों में फ्लोटर्स क्यों दिखाई देते हैं?
आँख के अंदर, लेंस और रेटिना के बीच, एक ट्रांसपेरेंट, जेली जैसा पदार्थ होता है जिसे विट्रियस कहते हैं। समय के साथ, इस जेली का स्ट्रक्चर बदल जाता है, और इसके अंदर के कोलेजन फाइबर आपस में चिपक सकते हैं। जब इन फ़ाइबर पर रोशनी पड़ती है, तो वे रेटिना पर परछाई डालते हैं, जिससे व्यक्ति को काले धब्बे, धागे या जाल जैसे दिखने वाले फ़्लोटर्स दिखाई देते हैं। कभी-कभी, रेटिना से विट्रियस का अलग होना इस कंडीशन को पोस्टीरियर विट्रियस डिटैचमेंट (PVD) कहते हैं से भी फ़्लोटर्स हो सकते हैं। हालांकि यह प्रोसेस नॉर्मल हो सकता है, लेकिन कुछ मामलों में, यह रेटिना टियर या रेटिना डिटैचमेंट जैसी गंभीर समस्याओं से जुड़ा हो सकता है।
कम उम्र के लोगों में आई फ़्लोटर्स के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?
आई फ़्लोटर्स को पहले उम्र से जुड़ी समस्या माना जाता था, लेकिन अब इसके मामले युवा वयस्कों और टीनएजर्स में भी रिपोर्ट किए जा रहे हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, हाई मायोपिया वाले लोगों में रेटिना कमज़ोर होने का खतरा ज़्यादा होता है, जिससे फ़्लोटर्स होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा, मोबाइल फ़ोन, लैपटॉप और दूसरे डिजिटल डिवाइस का लंबे समय तक इस्तेमाल सीधे फ़्लोटर्स का कारण नहीं बनता है; हालांकि, तेज़ स्क्रीन की चमक पहले से मौजूद फ़्लोटर्स को और ज़्यादा साफ़ दिखा सकती है। इसके अलावा, बाहर बहुत कम समय बिताना और लगातार पास की चीज़ों पर ध्यान देना भी मायोपिया को बढ़ाने वाले कारण हैं।
किन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें?
डॉक्टरों के मुताबिक, अगर अचानक बहुत सारे नए फ्लोटर्स दिखाई देने लगें, आंखों में बिजली चमकने जैसी फ्लैश महसूस हो या नजर के किसी हिस्से पर पर्दा गिरने जैसी छाया दिखाई दे, तो इसे सामान्य समझने की गलती नहीं करनी चाहिए। ये लक्षण रेटिना टियर (Retinal Tear) या रेटिना डिटेचमेंट (Retinal Detachment) का संकेत हो सकते हैं। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है और समय पर इलाज न मिलने पर स्थायी रूप से दृष्टि जाने का खतरा भी हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है।
क्या आई फ्लोटर्स का इलाज किया जा सकता है?
हर आई फ्लोटर के इलाज की ज़रूरत नहीं होती। अगर जांच में रेटिना पूरी तरह से हेल्दी दिखता है, तो आमतौर पर रेगुलर मॉनिटरिंग ही एकमात्र सलाह दी जाती है, क्योंकि दिमाग आखिरकार फ्लोटर्स को नज़रअंदाज़ करना सीख जाता है। हालांकि, अगर फ्लोटर्स रेटिना में छेद, फटने या अलग होने की वजह से होते हैं, तो डॉक्टर लेज़र थेरेपी या सर्जरी की सलाह दे सकते हैं। स्पेशलिस्ट यह भी बताते हैं कि इस बात का कोई साइंटिफिक सबूत नहीं है कि खास विटामिन, सप्लीमेंट, आँखों की एक्सरसाइज या घरेलू नुस्खे फ्लोटर्स को खत्म कर सकते हैं। आँखों की सेहत बनाए रखने के सबसे असरदार तरीकों में रेगुलर आँखों का चेकअप, स्क्रीन इस्तेमाल करते समय बीच-बीच में ब्रेक लेना, बाहर काफ़ी समय बिताना और आँखों को चोट से बचाना शामिल है।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। आंखों के सामने अचानक अधिक फ्लोटर्स, तेज रोशनी की चमक या नजर में पर्दा जैसा महसूस होने पर तुरंत नेत्र विशेषज्ञ (Eye Specialist) से संपर्क करें। किसी भी उपचार या दवा की शुरुआत डॉक्टर की सलाह के बिना न करें।
