erer | Source: erereअमृतसर। पंजाब के अमृतसर स्थित श्री हरमंदिर साहिब, जिसे स्वर्ण मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, अपनी आध्यात्मिक महत्ता के साथ-साथ अद्भुत सुनहरी चमक के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। तेज धूप, आंधी, बारिश और बदलते मौसम के बावजूद मंदिर के स्वर्ण गुंबद हमेशा नए जैसे चमकते दिखाई देते हैं। कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर इसकी चमक सालों तक कैसे बनी रहती है। इसका उत्तर आधुनिक रसायनों में नहीं, बल्कि एक पारंपरिक और प्राकृतिक सफाई प्रक्रिया में छिपा है।

हर साल होती है विशेष सेवा

स्वर्ण मंदिर में लगे सुनहरे गुंबदों और सोने की परत की सफाई नियमित अंतराल पर विशेष सेवा के रूप में की जाती है। यह सेवा कई वर्षों से गुरु नानक निष्काम सेवक जत्था (बर्मिंघम, यूनाइटेड किंगडम) द्वारा निःस्वार्थ भाव से की जा रही है। इस सेवा के लिए किसी प्रकार का पारिश्रमिक नहीं लिया जाता और इसे पूरी श्रद्धा के साथ संपन्न किया जाता है।

सफाई अभियान के दौरान केवल श्री हरमंदिर साहिब का मुख्य गुंबद ही नहीं, बल्कि श्री अकाल तख्त साहिब, गुरुद्वारा बाबा अटल राय साहिब तथा घंटाघर ड्योढ़ी के सुनहरे गुंबदों की भी सफाई और आवश्यक संरक्षण कार्य किया जाता है।

रीठा और नींबू से तैयार होता है प्राकृतिक घोल

स्वर्ण मंदिर की सबसे खास बात यह है कि सोने की सफाई के लिए किसी भी प्रकार के रासायनिक क्लीनर का उपयोग नहीं किया जाता। इसके बजाय पारंपरिक देसी विधि अपनाई जाती है।

इस प्रक्रिया में सबसे पहले रीठा पाउडर को कई घंटों तक पानी में उबाला जाता है। इसके बाद उसमें नींबू का रस मिलाकर मिश्रण को सामान्य तापमान तक ठंडा किया जाता है। तैयार प्राकृतिक घोल का उपयोग सोने की परत को सावधानीपूर्वक साफ करने के लिए किया जाता है। यह तरीका सोने की चमक बनाए रखने के साथ उसकी सतह को सुरक्षित रखने में भी सहायक माना जाता है।

कई दिनों तक चलता है सफाई अभियान

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस विशेष सफाई अभियान में लगभग 20 किलोग्राम रीठा का उपयोग किया जाता है। करीब 60 सेवादार इस कार्य में भाग लेते हैं, जिनमें कई स्वयंसेवक ब्रिटेन से भी आते हैं। यह अभियान सामान्यतः मार्च महीने में आयोजित किया जाता है और लगभग 10 से 12 दिनों तक चलता है।

प्रतिदिन सुबह से शाम तक सुनहरी परत की सफाई के साथ-साथ मीनाकारी और अन्य कलात्मक कार्यों का निरीक्षण एवं संरक्षण भी किया जाता है।

प्राकृतिक विधि से सुरक्षित रहती है सुनहरी परत

विशेषज्ञों के अनुसार प्राकृतिक सफाई सामग्री का उपयोग करने से सोने की परत पर रासायनिक प्रभाव नहीं पड़ता। इससे उसकी चमक लंबे समय तक बनी रहती है और धातु की गुणवत्ता भी सुरक्षित रहती है। यही कारण है कि मौसम की मार झेलने के बावजूद स्वर्ण मंदिर की सुनहरी आभा वर्षों तक बरकरार रहती है।

सेवा, श्रद्धा और संरक्षण का अनूठा संगम

स्वर्ण मंदिर की यह परंपरा केवल सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सेवा, समर्पण और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का भी उत्कृष्ट उदाहरण है। दुनियाभर से आने वाले श्रद्धालु न केवल इसकी आध्यात्मिक गरिमा से प्रभावित होते हैं, बल्कि इसके रखरखाव और संरक्षण की अनूठी व्यवस्था की भी सराहना करते हैं। यही कारण है कि श्री हरमंदिर साहिब आज भी अपनी दिव्य सुंदरता और स्वर्णिम चमक के कारण विश्वभर में श्रद्धा और आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।