पश्चिम बंगाल में मिड-डे मील को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। राज्य सरकार ने कई स्कूलों में मिड-डे मील के मेन्यू में बदलाव करते हुए अंडे की जगह सोयाबीन को शामिल करने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद प्रोटीन के स्रोत को लेकर बहस शुरू हो गई है कि आखिर अंडा ज्यादा ताकतवर है या सोयाबीन। विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों ही प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं, लेकिन इनके पोषक तत्व, पाचन क्षमता और उपयोग अलग-अलग हैं।

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अंडा और सोयाबीन में कौन ज्यादा प्रोटीन देता है?

पोषण विशेषज्ञों के मुताबिक, एक बड़े अंडे में करीब 6-7 ग्राम उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन होता है, जबकि 100 ग्राम सोयाबीन में लगभग 36 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है। हालांकि, सोयाबीन की यह मात्रा सूखे दानों की होती है और इसे पकाकर खाने पर प्रोटीन की वास्तविक मात्रा कम हो जाती है। अंडे का प्रोटीन शरीर आसानी से अवशोषित कर लेता है, इसलिए इसे "कम्प्लीट प्रोटीन" माना जाता है।

क्या सोयाबीन अंडे की जगह ले सकता है?

विशेषज्ञों का कहना है कि सोयाबीन भी एक बेहतरीन प्लांट-बेस्ड प्रोटीन है और शाकाहारी लोगों के लिए अच्छा विकल्प माना जाता है। इसमें प्रोटीन के साथ फाइबर, आयरन और अन्य पोषक तत्व भी मिलते हैं। वहीं अंडे में प्रोटीन के अलावा विटामिन B12, विटामिन D, कोलीन और जरूरी अमीनो एसिड भी भरपूर मात्रा में होते हैं। इसलिए दोनों के अपने-अपने पोषण संबंधी फायदे हैं।

मिड-डे मील में बदलाव क्यों?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पश्चिम बंगाल सरकार ने कुछ स्कूलों में मिड-डे मील के मेन्यू में बदलाव करते हुए अंडे की जगह सोयाबीन शामिल किया है। इस फैसले के बाद बच्चों के पोषण और प्रोटीन की गुणवत्ता को लेकर बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के संतुलित विकास के लिए पर्याप्त प्रोटीन के साथ अन्य जरूरी पोषक तत्वों का भी ध्यान रखना आवश्यक है।