आजमगढ़। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में मंगलवार शाम हुए ट्रिपल मर्डर के बाद आधी रात तक चले पुलिस और कमांडो ऑपरेशन ने पूरे इलाके को दहला दिया। शंभूपुर गांव में पत्नी और दो पुजारियों की गोली मारकर हत्या करने के बाद आरोपी अरविंद सिंह अपने तीन बच्चों के साथ एक कमरे में बंद हो गया था। बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए लखनऊ से एटीएस की कमांडो टीम बुलाई गई। देर रात करीब 12:30 बजे पहुंची कमांडो टीम ने कमरे को घेरा, जिसके बाद आरोपी ने फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में अरविंद सिंह मारा गया। इस पूरे घटनाक्रम में उसके चार वर्षीय बेटे की भी मौत हो गई, जबकि छह वर्षीय बेटी के हाथ में गोली लगने की जानकारी सामने आई है।
चार दिन से घर में चल रहा था अनुष्ठान, फिर अचानक बिगड़ गया माहौल
जानकारी के अनुसार, शंभूपुर गांव निवासी अरविंद सिंह को लेकर उसके परिजनों को भूत-प्रेत का साया होने का शक था। बताया गया कि अरविंद शराब का भी आदी था और उसका इलाज चल रहा था। उसके ऊपर से कथित तौर पर भूत-प्रेत का साया हटाने के उद्देश्य से घर में पिछले चार दिनों से अनुष्ठान कराया जा रहा था। बुधवार को इस अनुष्ठान की पूर्णाहुति होनी थी।
मंगलवार शाम अरविंद की 32 वर्षीय पत्नी बबिता पूजा में बैठी थी। अहरौला क्षेत्र के पठखौली गांव निवासी 55 वर्षीय महेंद्र पाठक और छिताना गोझा गांव निवासी 50 वर्षीय अखिलेश मिश्र समेत चार पुजारी अनुष्ठान करा रहे थे। इसी दौरान शाम करीब साढ़े छह बजे अरविंद नशे की हालत में घर पहुंचा और पूजा का विरोध करने लगा।
आधार कार्ड मांगने से शुरू हुआ विवाद, फिर रिवॉल्वर लेकर आया आरोपी
बताया गया कि घर पहुंचने के बाद अरविंद ने वहां मौजूद पुजारियों से उनका आधार कार्ड मांगना शुरू कर दिया। इसी बात को लेकर उसके और पुजारियों के बीच बहस होने लगी। पत्नी बबिता ने जब स्थिति को शांत करने का प्रयास किया तो विवाद और बढ़ गया।
इसी दौरान अरविंद कथित तौर पर रिवॉल्वर लेकर आया और उसने पत्नी पर गोली चला दी। इसके बाद वहां मौजूद दो पुजारियों को भी गोली मार दी। गोली लगने से बबिता और दोनों पुजारियों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद वहां मौजूद दो अन्य पुजारी और परिवार के लोग किसी तरह घर से बाहर निकल गए।
गोलियों की आवाज से मची अफरातफरी, तीन बच्चों के साथ कमरे में बंद हो गया आरोपी
घर के भीतर से गोलियां चलने की आवाज सुनकर आसपास के लोग भी बाहर निकल आए। कुछ ही देर में इलाके में अफरातफरी का माहौल बन गया। घटना की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस के पहुंचने तक आरोपी अपने तीन बच्चों को साथ लेकर एक कमरे में बंद हो चुका था।
कमरे में आरोपी के साथ उसकी छह वर्षीय और आठ माह की दो बेटियां तथा चार वर्षीय बेटा मौजूद था। बच्चों की सुरक्षा पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई। आरोपी के पास हथियार होने के कारण पुलिस ने तत्काल कमरे में सीधे प्रवेश करने के बजाय उसे बाहर निकालने की कोशिश शुरू की।
रात में बढ़ी चुनौती, लखनऊ से बुलाए गए एटीएस कमांडो
घटना की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी सुनील कुमार सिंह और एसएसपी डॉ. अनिल कुमार तीन थानों की पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। रात करीब साढ़े 11 बजे एडीजी वाराणसी जोन नवीन अरोड़ा भी घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने आरोपी को बच्चों समेत सुरक्षित बाहर निकालने के लिए अभियान की तैयारी की।
इसके बाद लखनऊ से एटीएस के करीब दर्जन भर कमांडो बुलाए गए। रात लगभग 12:30 बजे कमांडो टीम आजमगढ़ पहुंची और मौके पर मोर्चा संभाल लिया। कमांडो टीम ने आरोपी को कमरे से बाहर निकालने की कार्रवाई शुरू की।
कमांडो पर पांच गोलियां चलाने का दावा, जवाबी कार्रवाई में आरोपी ढेर
एडीजी के अनुसार, कमांडो टीम के पहुंचने के बाद आरोपी ने उन पर पांच राउंड फायरिंग की। इसके जवाब में कमांडो टीम की ओर से चार राउंड गोलियां चलाई गईं। जवाबी कार्रवाई में अरविंद सिंह मारा गया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य आरोपी के कब्जे में मौजूद बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना था। हालांकि, इस दौरान चार वर्षीय बेटे की भी मौत हो गई। छह वर्षीय बेटी के हाथ में गोली लगने की जानकारी दी गई है। बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए देर रात तक चलाए गए इस अभियान का अंत आरोपी की मौत के साथ हुआ।
बेटे की मौत को लेकर भी सामने आई जानकारी
पुलिस की ओर से यह भी बताया गया कि कमांडो कार्रवाई से पहले आरोपी ने अपने चार वर्षीय बेटे को गोली मार दी थी। हालांकि घटनाक्रम के अलग-अलग हिस्सों को लेकर पुलिस जांच कर रही है। इस मामले में आरोपी के मानसिक स्वास्थ्य और घटना से पहले की परिस्थितियों की भी जांच की जा रही है।
पुलिस ने मानसिक बीमारी और इलाज की भी दी जानकारी
एडीजी वाराणसी जोन नवीन अरोड़ा ने बताया कि आरोपी अरविंद मानसिक रूप से बीमार था और उसका इलाज भी चल रहा था। परिजनों को उसके ऊपर भूत-प्रेत का साया होने की आशंका थी, जिसके चलते घर में चार दिनों से पूजा-पाठ और अनुष्ठान कराया जा रहा था।
पुलिस के अनुसार, इसी अनुष्ठान के दौरान अरविंद के विरोध और परिवार तथा पुजारियों के साथ हुए विवाद ने बेहद गंभीर रूप ले लिया। देखते ही देखते पत्नी और दो पुजारियों की हत्या हो गई और आरोपी अपने तीन बच्चों के साथ कमरे में बंद हो गया।
आधी रात का ऑपरेशन बना पूरे घटनाक्रम का सबसे गंभीर दौर
आजमगढ़ की इस घटना में मंगलवार शाम से शुरू हुआ घटनाक्रम आधी रात तक चलता रहा। पहले घर में पूजा करा रहे लोगों पर गोलियां चलीं, फिर आरोपी बच्चों के साथ कमरे में बंद हो गया। पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी और कई घंटे की कोशिश के बाद लखनऊ से एटीएस कमांडो बुलाए गए। कमांडो कार्रवाई के दौरान आरोपी की मौत हुई और उसके चार वर्षीय बेटे की भी जान चली गई।
