ere | Source: eereपटना। बिहार के भोजपुर जिले के आरा में भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने एक बार फिर सियासी और कानूनी हलचल तेज कर दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को सोशल मीडिया के माध्यम से बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि न्यायिक जांच की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर बिहार सरकार दिवंगत भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता देगी और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है, क्योंकि भरत तिवारी के भाई चंदन तिवारी ने साफ कहा है कि उनके परिवार की मांग आर्थिक सहायता या नौकरी नहीं, बल्कि न्याय है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर भरत तिवारी के परिवार के लिए सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि न्यायिक जांच की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर बिहार सरकार दिवंगत भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करेगी। इसके साथ ही परिवार के एक परिजन को सरकारी नौकरी भी दी जाएगी। मुख्यमंत्री की घोषणा ऐसे समय हुई है, जब भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर पहले से ही गंभीर सवाल उठते रहे हैं और मामले की जांच न्यायिक स्तर पर चल रही है।

परिवार ने कहा- नौकरी और आर्थिक सहायता नहीं, हमें न्याय चाहिए

मुख्यमंत्री के ऐलान पर भरत तिवारी के भाई चंदन तिवारी ने तत्काल प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि परिवार की ओर से ऐसी कोई मांग नहीं की गई थी। चंदन तिवारी ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री की ओर से की गई इस घोषणा की जानकारी भी नहीं थी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनके परिवार को न्याय चाहिए।

चंदन तिवारी के अनुसार, भरत तिवारी की मौत के लिए जो लोग जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ सरकार को कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल आर्थिक सहायता या परिवार के किसी सदस्य को नौकरी देने से उनकी मांग पूरी नहीं होगी। परिवार चाहता है कि मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो और सभी आरोपियों को कानून के दायरे में लाया जाए।

अब तक एक आरोपी गिरफ्तार, बाकी पर भी कार्रवाई की मांग

भरत तिवारी के भाई ने कहा कि अब तक इस मामले में एक आरोपी की गिरफ्तारी हुई है। परिवार की मांग है कि अन्य आरोपियों को भी जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए। उनका कहना है कि जब तक भरत तिवारी की मौत के लिए जिम्मेदार सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक परिवार को न्याय मिलने की भावना पूरी नहीं होगी।

इस मामले में पुलिस एनकाउंटर के नाम पर भरत तिवारी पर पहली गोली चलाने वाले एसटीएफ जवान को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी की शिकायत के आधार पर मामले में हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई है और कानूनी कार्रवाई जारी है।

हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की जांच हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में की जा रही है। इसी न्यायिक जांच की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने परिवार को आर्थिक सहायता और एक परिजन को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। सरकार की इस घोषणा से यह स्पष्ट है कि मामले में न्यायिक जांच की रिपोर्ट को आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।

17 जून को बिलौटी गांव में हुई थी भरत तिवारी की मौत

भरत भूषण तिवारी को 17 जून 2026 को बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस कार्रवाई के दौरान गोली लगी थी। पुलिस की ओर से भरत तिवारी को पांच गोलियां मारे जाने की बात सामने आई। इस घटना के एक दिन पहले भरत तिवारी का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह पुलिस पर पिस्तौल तानता हुआ दिखाई दे रहा था।

एनकाउंटर के बाद इस घटना को लेकर बिहार में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। मामले को लेकर सत्ता पक्ष के नेताओं की ओर से भी सवाल उठाए गए और एनकाउंटर को लेकर सार्वजनिक तौर पर विरोध सामने आया। घटना का विरोध सड़क से लेकर सदन तक देखने को मिला।

कई प्रमुख नेताओं ने एनकाउंटर पर उठाए सवाल

भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर बिहार की राजनीति में भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और बिहार के मंत्री अशोक चौधरी समेत कई नेताओं ने इस एनकाउंटर को फर्जी बताया। इन नेताओं की टिप्पणियों के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया।

मामले में तत्कालीन एसडीपीओ राजेश शर्मी पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। एनकाउंटर की परिस्थितियों और इसमें शामिल पुलिसकर्मियों की भूमिका को लेकर उठे सवालों के बीच न्यायिक जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

भाजपा सांसद मनोज तिवारी के सहयोग से परिवार ने की थी मुख्यमंत्री से मुलाकात

बताया गया है कि पिछले दिनों भाजपा सांसद मनोज तिवारी के सहयोग से भरत तिवारी के परिजनों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने परिवार को त्वरित कार्रवाई करते हुए उचित कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया था। इसके बाद अब मुख्यमंत्री की ओर से आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की गई है।

हालांकि, परिवार की प्रतिक्रिया ने सरकार की घोषणा के साथ ही मामले की प्राथमिकता को लेकर एक अलग सवाल खड़ा कर दिया है। परिवार का कहना है कि उनकी पहली और मुख्य मांग न्याय है तथा वे चाहते हैं कि भरत तिवारी की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई हो।

एनकाउंटर से जुड़े सवालों के बीच सरकार की घोषणा अहम

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में एक तरफ न्यायिक जांच जारी है, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने परिवार के लिए आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी का ऐलान किया है। दूसरी ओर, परिवार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल सहायता को पर्याप्त नहीं मानता और मामले में जिम्मेदार लोगों पर कानूनी कार्रवाई चाहता है।

इस पूरे घटनाक्रम में अब न्यायिक जांच की अंतरिम रिपोर्ट और उसके आधार पर आगे होने वाली कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। फिलहाल एक एसटीएफ जवान की गिरफ्तारी, हत्या की प्राथमिकी और न्यायिक जांच की प्रक्रिया के बीच मुख्यमंत्री की घोषणा से मामला एक बार फिर सुर्खियों में है।