erere | Source: rereनई दिल्ली। भारत में 5G नेटवर्क का विस्तार तेजी से हो रहा है और आने वाले वर्षों में देश में 5G अपनाने की दर एशिया-पैसिफिक क्षेत्र के औसत से काफी अधिक रहने का अनुमान है। GSMA की नई रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2030 तक भारत में 62 प्रतिशत लोग 5G सेवा अपना सकते हैं। वहीं, एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में 5G अपनाने का औसत करीब 50 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

भारत में तेजी से बढ़ रहा 5G का इस्तेमाल

GSMA की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 5G उपयोगकर्ताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। देश में फिलहाल रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया (Vi) वायरलेस 5G सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। इसके अलावा सरकारी दूरसंचार कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) भी 5G सेवा शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, BSNL दिसंबर तक 5G सेवा उपलब्ध करा सकती है।

5G अपनाने में भारत एशिया-पैसिफिक से आगे

लंदन स्थित वैश्विक दूरसंचार संगठन GSMA के अनुसार भारत को बांग्लादेश, इंडोनेशिया और पाकिस्तान के साथ 5G अपनाने के मामले में तेजी से आगे बढ़ने वाले देशों में गिना जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था की वृद्धि को गति देने और मोबाइल उद्योग को टिकाऊ बनाने के लिए नियामकीय व्यवस्था को आधुनिक बनाना जरूरी है।

भारत में 2030 तक 62 प्रतिशत लोगों के 5G अपनाने का अनुमान एशिया-पैसिफिक क्षेत्र के 50 प्रतिशत औसत से काफी अधिक है। यह अंतर भारत में नई पीढ़ी के मोबाइल नेटवर्क को अपनाने की तेज रफ्तार को दर्शाता है।

अब गांव-गांव नेटवर्क पहुंचाना ही सबसे बड़ी चुनौती नहीं

GSMA का कहना है कि भारत और दक्षिण एशिया में अब चुनौती केवल नेटवर्क को अधिक से अधिक इलाकों तक पहुंचाने तक सीमित नहीं रह गई है। रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण एशिया में जिन इलाकों तक नेटवर्क नहीं पहुंच पाया था, उनका हिस्सा पहले करीब 30 प्रतिशत था, जो अब घटकर 5 प्रतिशत से भी कम रह गया है।

ऐसे में अब बड़ा सवाल यह है कि उपलब्ध नेटवर्क और इंटरनेट सेवाओं का लोग कितना प्रभावी इस्तेमाल कर पा रहे हैं और उन्हें डिजिटल सेवाओं को अपनाने के लिए किन सुविधाओं की जरूरत है।

सस्ता इंटरनेट, उपकरण और डिजिटल कौशल बनेंगे बड़ी चुनौती

रिपोर्ट के अनुसार मोबाइल इंटरनेट को अपनाने में अब किफायती कीमत, उपकरणों की उपलब्धता, डिजिटल कौशल, इंटरनेट की उपयोगिता को लेकर लोगों की समझ, भरोसा और ऑनलाइन सुरक्षा जैसी चुनौतियां महत्वपूर्ण हैं।

इसका मतलब यह है कि केवल तेज नेटवर्क उपलब्ध करा देना पर्याप्त नहीं होगा। लोगों के पास 5G समर्थित उपकरण हों, इंटरनेट सेवाओं का इस्तेमाल करने का कौशल हो और उन्हें ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर पर्याप्त भरोसा हो, यह भी जरूरी होगा।

भारतनेट और PMGDISHA पर GSMA की नजर

भारत में डिजिटल पहुंच और कौशल बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी GSMA की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है। इनमें भारतनेट (BharatNet) और पीएमजीदिशा (PMGDISHA) प्रमुख हैं।

PMGDISHA के माध्यम से 6.4 करोड़ से अधिक ग्रामीण लोगों को बुनियादी डिजिटल कौशल का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ग्रामीण आबादी को डिजिटल सेवाओं और इंटरनेट आधारित सुविधाओं से जोड़ने में इस तरह के प्रयास महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

भारतनेट के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। नेटवर्क उपलब्धता और डिजिटल कौशल के विस्तार को साथ लेकर चलने से ग्रामीण आबादी के लिए इंटरनेट आधारित सेवाओं का इस्तेमाल आसान हो सकता है।

5G के बाद 6G पर भी भारत की नजर

भारत में अभी 5G नेटवर्क का विस्तार जारी है, लेकिन दूरसंचार क्षेत्र में अगली पीढ़ी की तकनीक 6G को लेकर भी तैयारियों पर जोर दिया जा रहा है। 5G के व्यापक इस्तेमाल के बाद आने वाले वर्षों में नई डिजिटल जरूरतों के अनुरूप और अधिक उन्नत नेटवर्क तकनीक की आवश्यकता बढ़ सकती है।

इस लिहाज से भारत के लिए 5G का विस्तार भविष्य की दूरसंचार तकनीकों के लिए आधार तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

BSNL की 5G एंट्री से बढ़ेगा विकल्प

फिलहाल देश में रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और Vodafone Idea (Vi) 5G सेवाएं दे रही हैं। BSNL के 5G नेटवर्क की शुरुआत होने के बाद सरकारी दूरसंचार कंपनी के उपभोक्ताओं को भी नई पीढ़ी की मोबाइल सेवा का विकल्प मिल सकता है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार BSNL दिसंबर तक 5G सेवा उपलब्ध कराने की तैयारी में है। इससे देश में 5G सेवाओं का दायरा और बढ़ने की उम्मीद है।

2030 का आंकड़ा क्यों है खास?

2030 तक भारत में 62 प्रतिशत लोगों द्वारा 5G अपनाने का अनुमान देश के डिजिटल भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण है। यदि यह अनुमान साकार होता है तो बड़ी संख्या में मोबाइल उपयोगकर्ता 5G नेटवर्क की ओर स्थानांतरित हो सकते हैं।

हालांकि रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि 5G की सफलता केवल नेटवर्क कवरेज पर निर्भर नहीं करेगी। किफायती उपकरण, डिजिटल कौशल, इंटरनेट की उपयोगिता, भरोसा और ऑनलाइन सुरक्षा जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना जरूरी होगा।