ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान सितंबर में भारत दौरे पर आने वाले हैं। वह नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। ईरानी सूत्रों ने 14 अगस्त को उनके भारत दौरे की पुष्टि की है। भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और सम्मेलन 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होना है।

पेजेशकियान का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब पश्चिम एशिया में तनाव काफी बढ़ा हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का असर पूरे क्षेत्र पर दिखाई दे रहा है। ऐसे माहौल में ईरान के राष्ट्रपति का भारत आना सिर्फ BRICS बैठक तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इस दौरे के दौरान क्षेत्रीय हालात और दोनों देशों के रिश्तों पर भी बातचीत की उम्मीद है।

भारत के लिए भी यह यात्रा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस साल BRICS की कमान भारत के पास है। भारत की अध्यक्षता में होने वाले BRICS कार्यक्रमों का फोकस आर्थिक सहयोग के साथ-साथ वैश्विक मुद्दों पर मिलकर काम करने पर है। भारत ने अपनी BRICS अध्यक्षता के लिए 'Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability' थीम रखी है।

ईरान की BRICS में भूमिका भी पिछले कुछ समय में बढ़ी है। ईरान 2024 में BRICS का सदस्य बना था। अब पेजेशकियान का भारत में होने वाले शिखर सम्मेलन में शामिल होना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि तेहरान इस समूह के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करना चाहता है। हाल ही में ईरान के केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने भी BRICS के न्यू डेवलपमेंट बैंक में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही थी।

इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पेजेशकियान की मुलाकात पर भी सबकी नजर रहेगी। दोनों नेताओं की मुलाकात अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में हुए BRICS सम्मेलन के दौरान हुई थी। उस बैठक में भारत और ईरान के बीच रिश्तों, व्यापार और पश्चिम एशिया की स्थिति पर बातचीत हुई थी। मोदी ने उस समय पेजेशकियान को भारत आने का न्योता भी दिया था, जिसे ईरानी राष्ट्रपति ने स्वीकार किया था।

भारत और ईरान के रिश्तों में चाबहार बंदरगाह काफी अहम मुद्दा है। दोनों देश इसे व्यापार और मध्य एशिया तक संपर्क बढ़ाने के नजरिए से महत्वपूर्ण मानते हैं। 2024 में मोदी और पेजेशकियान की मुलाकात के दौरान भी चाबहार पोर्ट से जुड़े लंबे समय के समझौते को दोनों देशों के संबंधों के लिए अहम बताया गया था।

पेजेशकियान के भारत दौरे का एक और पहलू पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति है। ईरान की तरफ से पहले भी भारत से क्षेत्र में तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने में भूमिका निभाने की उम्मीद जताई गई है। ऐसे में BRICS सम्मेलन के दौरान इस मुद्दे पर अलग-अलग देशों के नेताओं के बीच बातचीत हो सकती है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि मोदी और पेजेशकियान की द्विपक्षीय बैठक में किन-किन मुद्दों पर औपचारिक चर्चा होगी।

कुल मिलाकर, पेजेशकियान का भारत दौरा ऐसे वक्त हो रहा है जब BRICS का महत्व लगातार बढ़ रहा है और पश्चिम एशिया में तनाव भी बना हुआ है। नई दिल्ली में होने वाले सम्मेलन में दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के नेता जुटेंगे। ऐसे में भारत और ईरान के बीच होने वाली बातचीत पर कूटनीतिक और रणनीतिक नजरें बनी रहेंगी।