
महिला आरक्षण को लेकर पी. चिदंबरम बोले।Source : Chrome
महिला आरक्षण कानून को लागू करने की समयसीमा को लेकर केंद्र और विपक्ष के बीच एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बीच हुई बयानबाजी के बाद अब पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। चिदंबरम का कहना है कि महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन से जोड़ना अनावश्यक है और इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू किया जा सकता है।
रिजिजू के बयान पर चिदंबरम का पलटवार
महिला आरक्षण को लेकर किरेन रिजिजू का कहना है कि मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत इसे लागू करने के लिए जनगणना और उसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया जरूरी है। इसी वजह से उनका तर्क है कि आरक्षण 2034 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू होना संभव नहीं होगा।राहुल गांधी ने इस दलील पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिला आरक्षण से जुड़ा कानून पहले ही संसद से पारित हो चुका है और इसे बिना किसी अतिरिक्त शर्त के लागू किया जाना चाहिए।अब पी. चिदंबरम भी राहुल गांधी के समर्थन में सामने आए हैं।
चिदंबरम ने सरकार पर लगाया ‘छिपे एजेंडे’ का आरोप
पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए किरेन रिजिजू के तर्क को गलत बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए लोकसभा में आरक्षण का प्रावधान संविधान के 106वें संशोधन के जरिए कानून का हिस्सा बनाया जा चुका है।
चिदंबरम का आरोप है कि केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण को जानबूझकर जनगणना और परिसीमन से जोड़ दिया, जिसकी वजह से कानून को तुरंत लागू नहीं किया जा सका।
उनके मुताबिक, अगर महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने वाली शर्त हटा दी जाए तो इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू किया जा सकता है।
क्या है नारी शक्ति वंदन अधिनियम?
नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया है। यह कानून संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है।हालांकि, इसके लागू होने की प्रक्रिया को जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया है। इसी प्रावधान को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद बना हुआ है।
2029 या 2034, कब लागू होगा महिला आरक्षण?
यही सवाल अब राजनीतिक बहस के केंद्र में है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार चाहे तो महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू कर सकती है। वहीं केंद्र की ओर से परिसीमन और जनगणना की प्रक्रिया को इसकी राह में जरूरी कदम बताया जा रहा है।ऐसे में महिला आरक्षण को लेकर शुरू हुई यह बहस आने वाले दिनों में संसद और राजनीति, दोनों में और तेज होने के आसार हैं।
