erer | Source: ereनई दिल्ली। छोटी बचत योजनाओं में पैसा लगाने वाले लाखों निवेशकों की नजर अब वित्त मंत्रालय के अगले फैसले पर है। सरकार 30 सितंबर को अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के लिए छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों की समीक्षा कर सकती है। इस समीक्षा के दायरे में सार्वजनिक भविष्य निधि (PPF), सुकन्या समृद्धि योजना, वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (SCSS), डाकघर सावधि जमा, डाकघर आवर्ती जमा (RD) समेत कई योजनाएं शामिल हैं।

हर तीन महीने में होती है ब्याज दरों की समीक्षा

छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों की सरकार हर तीन महीने में समीक्षा करती है। वित्त मंत्रालय बाजार की परिस्थितियों और संबंधित आर्थिक संकेतकों को ध्यान में रखते हुए यह तय करता है कि मौजूदा ब्याज दरों में बदलाव की जरूरत है या नहीं। इस बार अक्टूबर से दिसंबर 2026 की तिमाही के लिए दरों पर फैसला किया जाना है।

इस फैसले का असर उन लोगों पर पड़ सकता है जो सुरक्षित बचत और नियमित आय के लिए डाकघर तथा सरकार समर्थित छोटी बचत योजनाओं में निवेश करते हैं। हालांकि, ब्याज दरों में बदलाव होगा या मौजूदा दरें ही जारी रहेंगी, इसका अंतिम फैसला सरकार की घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।

महंगाई बढ़ी, बॉन्ड यील्ड भी 7 फीसदी के पार

छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों को लेकर इस बार बाजार में चर्चा इसलिए भी है क्योंकि हाल के महीनों में महंगाई और सरकारी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी देखी गई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई अप्रैल 2026 में 3.48 फीसदी थी, जो अगस्त 2026 में बढ़कर 4.82 फीसदी हो गई।

हालांकि यह आंकड़ा भारतीय रिजर्व बैंक की 6 फीसदी की ऊपरी सीमा से नीचे है, लेकिन अप्रैल से अगस्त के बीच हुई वृद्धि को कीमतों पर बढ़ते दबाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

सरकारी बॉन्ड की बढ़ी यील्ड से क्यों जुड़ा है ब्याज का मामला?

सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाली यील्ड भी हाल के महीनों में बढ़ी है और 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड 7 फीसदी से ऊपर पहुंच गई है। छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों को लेकर पहले भी सरकारी बॉन्ड यील्ड को एक महत्वपूर्ण संदर्भ के तौर पर देखा जाता रहा है।

श्यामाला गोपीनाथ समिति ने सिफारिश की थी कि छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों को संबंधित अवधि के सरकारी प्रतिभूति यानी जी-सेक की औसत यील्ड से जोड़ा जाए। इसमें अलग-अलग योजनाओं के लिए 25 से 100 बेसिस पॉइंट तक अतिरिक्त स्प्रेड रखने की सिफारिश की गई थी।

क्या इस बार PPF और सुकन्या का ब्याज बढ़ सकता है?

महंगाई और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के बीच छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में बदलाव की संभावना को लेकर चर्चा जरूर है। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार मौजूदा स्थिति में यह भी संभावना जताई जा रही है कि सरकार दरों को अपरिवर्तित रख सकती है। इसलिए PPF, सुकन्या समृद्धि योजना या SCSS का ब्याज बढ़ेगा, यह अभी निश्चित नहीं है।

अगर सरकार दरों में बढ़ोतरी करती है तो यह दिसंबर 2024 के बाद छोटी बचत योजनाओं में पहला बदलाव होगा। दिसंबर 2024 में सरकार ने सुकन्या समृद्धि खाते और तीन साल की डाकघर सावधि जमा की ब्याज दरों में वृद्धि की थी।

अभी किस छोटी बचत योजना पर कितना ब्याज मिल रहा है?

मौजूदा दरों के अनुसार डाकघर बचत खाते पर 4.00 फीसदी ब्याज मिल रहा है। एक साल की डाकघर सावधि जमा पर 6.90 फीसदी, दो साल की सावधि जमा पर 7.00 फीसदी और तीन साल की सावधि जमा पर 7.10 फीसदी ब्याज है। पांच साल की सावधि जमा पर ब्याज दर 7.50 फीसदी बताई गई है।

डाकघर आवर्ती जमा (RD) पर 6.70 फीसदी, मासिक आय योजना (MIS) पर 6.70 फीसदी और राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (NSC) पर 7.70 फीसदी ब्याज मिल रहा है।

PPF, SCSS और सुकन्या योजना की मौजूदा दर

सार्वजनिक भविष्य निधि यानी PPF पर मौजूदा ब्याज दर 7.10 फीसदी है। वरिष्ठ नागरिक बचत योजना यानी SCSS पर 8.20 फीसदी और सुकन्या समृद्धि योजना पर भी 8.20 फीसदी ब्याज मिल रहा है।

इन योजनाओं में निवेश करने वाले लोगों के लिए 30 सितंबर की समीक्षा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके बाद अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के लिए लागू ब्याज दरों की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

निवेशकों को अभी क्या समझना चाहिए?

छोटी बचत योजनाओं में निवेश करने वाले लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ब्याज दरों में बदलाव की कोई भी जानकारी सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही निश्चित मानी जानी चाहिए। महंगाई और बॉन्ड यील्ड जैसे संकेतक दरों में बदलाव की चर्चा को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन इनके आधार पर यह निश्चित नहीं कहा जा सकता कि सरकार किसी खास योजना का ब्याज बढ़ाएगी या घटाएगी।

इसलिए PPF, सुकन्या समृद्धि योजना, SCSS, डाकघर आरडी या सावधि जमा में निवेश करने वालों को 30 सितंबर को आने वाले आधिकारिक फैसले पर नजर रखनी होगी।