Source : Pinterest

Source : Pinterest

भोजपुर जिले के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की मौत का मामला बिहार की राजनीति और पुलिस व्यवस्था के लिए बड़ा सवाल बनता जा रहा है। कथित पुलिस मुठभेड़ के बाद सामने आए एक वायरल वीडियो ने पूरे घटनाक्रम को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। वीडियो में भरत तिवारी के आत्मसमर्पण करने के दावे किए जा रहे हैं, जबकि पुलिस की ओर से मुठभेड़ में कार्रवाई की बात कही गई है। इसी विरोधाभास ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। अब पूर्व केंद्रीय मंत्री और बक्सर के पूर्व सांसद अश्विनी कुमार चौबे भी खुलकर इस मुद्दे पर सामने आए हैं। उन्होंने घटना को लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भरत तिवारी की मौत कानून के दायरे में हुई कार्रवाई का परिणाम थी या फिर वायरल वीडियो में दिख रही तस्वीरें किसी बड़े सच की ओर इशारा कर रही हैं? जांच रिपोर्ट ही इस पूरे रहस्य से पर्दा उठा पाएगी।

आत्मसमर्पण के दावे के बाद बढ़ा विवाद

17 जून को भोजपुर के बिलौटी गांव में पुलिस और भरत भूषण तिवारी के बीच हुई कार्रवाई के बाद यह मामला चर्चा में आया। पुलिस का दावा है कि भरत हथियार के साथ पुलिस टीम के सामने था और कार्रवाई के दौरान घायल हुआ, जबकि परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि उसने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उसे गोली मारी गई। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने इन आरोपों को और हवा दी है। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई।

अश्विनी चौबे बोले- कानून से ऊपर कोई नहीं

पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने कहा कि यदि भरत भूषण तिवारी ने वास्तव में आत्मसमर्पण कर दिया था, तो उसे हिरासत में लेकर कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत में पेश किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी व्यक्ति को न्यायिक प्रक्रिया से 6 नहीं किया जा सकता। चौबे ने इसे न्याय व्यवस्था और मानवाधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए कहा कि दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने पीड़ित परिवार से मिलने और न्याय की लड़ाई में साथ खड़े रहने का भी भरोसा दिया।

सरकार ने शुरू की कार्रवाई, न्यायिक जांच के आदेश

मामले के तूल पकड़ने के बाद बिहार सरकार ने भी सख्त रुख अपनाया है। घटना से जुड़े विवाद और वायरल वीडियो के बाद शाहपुर थानाध्यक्ष समेत कई पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। वहीं राज्य सरकार ने पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच कराने का फैसला लिया है, जिसकी निगरानी सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी द्वारा किए जाने की बात सामने आई है। इस बीच भरत तिवारी की मौत के विरोध में ग्रामीणों ने प्रदर्शन भी किया और निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जो यह स्पष्ट करेगी कि पुलिस कार्रवाई नियमों के अनुरूप थी या नहीं।