
सज्जन कुमार के निधन पर श्रद्धांजलि को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक विवादSource : Chrome
1984 के सिख-विरोधी दंगों के मामले में दोषी ठहराए गए कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार के निधन के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस नेताओं की ओर से उनके निधन को लेकर दिए गए बयानों पर बीजेपी ने कड़ी आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि पार्टी दंगा पीड़ितों के जख्मों को फिर से कुरेद रही है।
बीजेपी ने उठाए श्रद्धांजलि पर सवाल
बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने 21 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस नेताओं ने सज्जन कुमार को आदर्श के तौर पर पेश किया। बीजेपी ने सवाल उठाया कि 1984 के दंगों में दोषी रहे व्यक्ति को पार्टी किस आधार पर रोल मॉडल बता सकती है।भंडारी ने राहुल गांधी और कांग्रेस की राजनीतिक सोच पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पार्टी को 1984 के दंगा पीड़ितों और उनके परिवारों से माफी मांगनी चाहिए।
दीपेंद्र हुड्डा के बयान से बढ़ा विवाद
विवाद तब और बढ़ गया जब कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने सज्जन कुमार के निधन को राजनीतिक रूप से बड़ी क्षति बताया। ANI से बातचीत में हुड्डा ने कहा कि उन्हें देशभर में एक आदर्श के रूप में देखा जाता है।हुड्डा के इस बयान पर बीजेपी नेता आरपी सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लिए सज्जन कुमार जैसे व्यक्ति को रोल मॉडल बताया जाना हैरान करने वाला है। उन्होंने 1984 के दंगों में मारे गए सिखों और उनके परिवारों की पीड़ा का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा।
1984 के दंगों का मुद्दा फिर चर्चा में
बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि 1984 के सिख-विरोधी दंगों में मारे गए लोगों के परिवार आज भी उस दर्द से बाहर नहीं निकल पाए हैं। उनका कहना है कि दोषी ठहराए गए व्यक्ति के प्रति सम्मानजनक शब्दों का इस्तेमाल पीड़ित परिवारों की भावनाओं को ठेस पहुंचाता है।बीजेपी ने यह भी कहा कि 1984 की घटनाओं को भुलाया नहीं जा सकता और इस मामले में कांग्रेस की भूमिका पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
एचएस फूलका ने भी कांग्रेस पर साधा निशाना
वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फूलका ने भी सज्जन कुमार को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने लंबे समय तक सज्जन कुमार को राजनीतिक संरक्षण दिया।फूलका ने दिल्ली हाई कोर्ट से जुड़े पुराने घटनाक्रम का हवाला देते हुए कहा कि सज्जन कुमार के खिलाफ मामलों में जांच और अभियोजन को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। उनका दावा है कि पीड़ितों की ओर से लगाए गए आरोपों के बावजूद उन्हें लंबे समय तक राजनीतिक संरक्षण मिलता रहा।
श्रद्धांजलि से ज्यादा बयान बने विवाद की वजह
सज्जन कुमार के निधन के बाद शुरू हुआ विवाद अब उनके निधन पर शोक जताने से ज्यादा नेताओं के बयानों को लेकर चर्चा में है। एक तरफ कांग्रेस नेताओं के बयान हैं, तो दूसरी ओर बीजेपी और 1984 के दंगा पीड़ितों की ओर से उन बयानों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। विवाद के बीच 1984 के सिख-विरोधी दंगों से जुड़े पुराने राजनीतिक और कानूनी मुद्दे एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं।
