erer | Source: ererपटना। बिहार में उद्योग और निवेश को लेकर सियासत उस समय तेज हो गई, जब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार के एक बड़े निवेश समझौते पर गंभीर सवाल उठाए। तेजस्वी यादव ने दावा किया कि बिहार सरकार के उद्योग विभाग ने परमाणु क्षेत्र में 22,500 करोड़ रुपये के निवेश के लिए जिस कंपनी के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया है, वह महज पांच महीने पुरानी है। उन्होंने कंपनी की स्थापना की तारीख और उसकी कथित पूंजी का हवाला देते हुए सरकार से पूछा कि इतनी कम पूंजी वाली कंपनी इतनी बड़ी राशि का निवेश किस तरह करेगी।

11 लाख रुपये की पूंजी और 22,500 करोड़ रुपये के निवेश का दावा

तेजस्वी यादव के अनुसार, जिस कंपनी के साथ बिहार में परमाणु क्षेत्र में 22,500 करोड़ रुपये के निवेश का एमओयू किया गया है, उसकी स्थापना 25 फरवरी 2026 को हुई थी। उन्होंने दावा किया कि कंपनी के पास कुल पूंजी केवल 11 लाख रुपये है। इसी आधार पर उन्होंने राज्य सरकार से निवेश समझौते की क्षमता और व्यवहारिकता को लेकर सवाल किया।

नेता प्रतिपक्ष ने पूछा कि अगर इतनी कम पूंजी वाली कंपनी को बिहार में हजारों करोड़ रुपये के निवेश का अवसर दिया जा रहा है, तो सरकार ने इस समझौते से पहले कंपनी की वित्तीय क्षमता और निवेश करने की योग्यता की किस तरह जांच की। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि भविष्य में कंपनी सरकारी सहायता, अनुदान या सब्सिडी लेकर राज्य से चली गई तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।

तेजस्वी बोले- सरकार बताए, पुराने एमओयू का क्या हुआ?

तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को जारी अपने बयान में बिहार की एनडीए सरकार की उद्योग नीति पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि बिहार सरकार, उद्योग विभाग और विभिन्न औद्योगिक समूहों के बीच करीब 51,500 करोड़ रुपये के निवेश समझौते किए जाने का प्रचार किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने सरकार से 2024, 2025 और उससे पहले किए गए दो लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश समझौतों की प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की।

तेजस्वी ने सवाल किया कि पहले जिन एमओयू के जरिए बिहार में बड़े पैमाने पर निवेश आने की बात कही गई थी, उनकी वर्तमान स्थिति क्या है। उन्होंने सरकार से यह बताने को कहा कि उन समझौतों में से कितने जमीन पर उतरे और कितने अब तक केवल कागजों तक सीमित हैं।

‘चारदीवारी बनाने की हैसियत नहीं, परमाणु परियोजना कैसे लगाएगी?’

तेजस्वी यादव ने अपने बयान में कंपनी की कथित वित्तीय क्षमता पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस कंपनी के पास किसी स्कूल या कॉलेज की चारदीवारी बनाने तक की पर्याप्त क्षमता नहीं है, वही बिहार में न्यूक्लियर पावर प्लांट या परमाणु अनुसंधान केंद्र स्थापित करने का दावा कर रही है।

उन्होंने कहा कि बिहार सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि 11 लाख रुपये की पूंजी वाली इस कंपनी के पास ऐसा कौन-सा संसाधन या वित्तीय आधार है, जिसके सहारे वह बिहार में हजारों करोड़ रुपये का निवेश करने जा रही है। तेजस्वी ने इसी सवाल को राज्य सरकार की निवेश नीति से जोड़ते हुए जवाबदेही की मांग की।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी साधा निशाना

आरजेडी नेता ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अधिकारियों और मंत्रियों की मौजूदगी में किसी कंपनी की ओर से इतना बड़ा निवेश दावा किया गया, लेकिन कथित तौर पर किसी ने इस पर सवाल नहीं उठाया।

तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार निवेश के बड़े-बड़े आंकड़े पेश कर रही है, लेकिन इन प्रस्तावों की वास्तविक क्षमता और उनकी जमीन पर उतरने की स्थिति को लेकर पर्याप्त जानकारी सामने नहीं रखी जा रही है। उन्होंने सरकार से निवेश समझौतों को लेकर पारदर्शिता बरतने की मांग की।

सब्सिडी और सरकारी जमीन को लेकर भी उठाए सवाल

तेजस्वी यादव ने अपने आरोपों में सरकारी सहायता, सब्सिडी और जमीन के मुद्दे को भी शामिल किया। उन्होंने आशंका जताई कि भविष्य में कथित कागजी कंपनियों को सरकारी खजाने से सस्ती या मुफ्त जमीन और सब्सिडी उपलब्ध कराई जा सकती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि निवेश के नाम पर सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल गलत तरीके से किया गया तो इससे बिहार के हितों को नुकसान हो सकता है। तेजस्वी ने कहा कि बड़ी कंपनियां बिहार में आएं, उद्योग स्थापित करें और अपनी पूंजी का निवेश करें तो उनका स्वागत किया जाएगा और उन्हें सहयोग भी दिया जाएगा।

‘एक रुपये में जमीन लेकर अनुदान लेकर भाग गई तो?’

तेजस्वी यादव ने कहा कि अगर कोई वास्तविक कंपनी बिहार में उद्योग स्थापित करने के लिए आती है और अपनी पूंजी लगाती है तो उसका स्वागत होना चाहिए। लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी कथित कागजी कंपनी को बेहद कम कीमत पर जमीन दी जाती है और बाद में वह सरकारी अनुदान या सब्सिडी लेकर राज्य से चली जाती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।

उन्होंने कहा कि बिहार के लोग ऐसे मामले को स्वीकार नहीं करेंगे। तेजस्वी के बयान में सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल, निवेश समझौतों की निगरानी और कंपनियों की वित्तीय क्षमता की जांच को लेकर सवाल प्रमुख रहे।

‘सरकार प्रचार करवा रही, जमीन पर हालात नहीं बदले’

नेता प्रतिपक्ष ने बिहार सरकार पर प्रचार के जरिए अपनी उपलब्धियां बताने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि सरकार निवेश और उद्योग के बड़े आंकड़े सामने रखकर अपनी उपलब्धियों का प्रचार कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति में अपेक्षित बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है।

तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि बिहार में वास्तविक औद्योगिक विकास के लिए निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारना जरूरी है। उनके अनुसार, केवल एमओयू या निवेश घोषणाओं से रोजगार और उद्योग का लक्ष्य पूरा नहीं होगा, बल्कि परियोजनाओं की वास्तविक प्रगति भी दिखाई देनी चाहिए।

51,500 करोड़ के निवेश समझौतों पर भी सियासी नजर

बिहार में उद्योग और निवेश को लेकर सरकार की ओर से 51,500 करोड़ रुपये के समझौतों की चर्चा के बीच तेजस्वी यादव के आरोपों ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। उन्होंने एक ओर नए निवेश समझौतों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया, वहीं दूसरी ओर पुराने निवेश प्रस्तावों की स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है।

इस पूरे विवाद का केंद्र 22,500 करोड़ रुपये के कथित निवेश वाले उस एमओयू पर है, जिसे लेकर तेजस्वी यादव ने कंपनी की स्थापना की तारीख और 11 लाख रुपये की कथित पूंजी का उल्लेख किया है। अब सरकार और संबंधित पक्षों की ओर से इस कंपनी की वित्तीय क्षमता, निवेश की संरचना और समझौते की शर्तों पर क्या जानकारी सामने आती है, यह इस मुद्दे की अगली कड़ी तय करेगा।