ere | Source: errनई दिल्ली। कृषि भवन परिसर में स्थित एक सदी से अधिक पुरानी कदीमी मस्जिद को हटाने के मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। केंद्र सरकार की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट में मस्जिद हटाने के पक्ष में दी गई दलील पर एआईएमआईएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने सरकार की धर्मनिरपेक्षता संबंधी दलील पर पलटवार करते हुए सेंट्रल विस्टा परियोजना के भूमि पूजन का मुद्दा उठाया है।

भूमि पूजन की तस्वीर साझा कर सरकार पर निशाना

ओवैसी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर 4 फरवरी 2021 की एक तस्वीर साझा की। इसमें तत्कालीन केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के राज्यमंत्री हरदीप सिंह पुरी सेंट्रल विस्टा एवेन्यू के भूमि पूजन कार्यक्रम में नजर आ रहे हैं। ओवैसी ने सवाल किया कि यदि सरकारी परिसर में धार्मिक ढांचे की मौजूदगी धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के खिलाफ है, तो फिर सेंट्रल विस्टा परियोजना की शुरुआत धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ क्यों की गई थी।

उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर सार्वजनिक परियोजना में धार्मिक परंपराओं के इस्तेमाल पर आपत्ति नहीं जताती, वहीं दूसरी ओर 1912 से भी पहले से मौजूद कदीमी मस्जिद को हटाने की बात कर रही है। ओवैसी के मुताबिक, कृषि भवन के निर्माण से पहले से यह मस्जिद वहां मौजूद है।

केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट में क्या दी दलील?

केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा है कि कृषि भवन और केंद्रीय सचिवालय परिसर सरकारी प्रशासन तथा जनसेवा के कार्यों के लिए निर्धारित धर्मनिरपेक्ष सार्वजनिक स्थल हैं। ऐसे परिसर में किसी स्थायी धार्मिक ढांचे को बनाए रखना सरकारी संपत्ति के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के अनुरूप नहीं है।

सरकार के अनुसार, सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास मास्टर प्लान के तहत प्लॉट नंबर 120 पर कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट की इमारतों 4 और 5 का पुनर्विकास किया जाना है। इस योजना में मौजूदा शास्त्री भवन और कृषि भवन परिसर भी शामिल हैं। इसी निर्माण योजना के चलते मस्जिद को हटाने की आवश्यकता बताई गई है।

मस्जिद के केयरटेकर ने दाखिल की है याचिका

इस विवाद को लेकर कदीमी मस्जिद के केयरटेकर ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में मस्जिद और वक्फ संपत्ति को गिराने, हटाने या किसी भी तरह से नुकसान पहुंचाने की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई है। इसके जवाब में केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए मस्जिद हटाने की जरूरत बताई है।

मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में अगली सुनवाई 23 नवंबर को निर्धारित है। अब इस सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।