rere | Source: ererनई दिल्ली। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) से जुड़े विवाद और कथित पेपर लीक के मुद्दे को लेकर राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान एक ऐसा दृश्य लगातार देखने को मिला जिसने हजारों प्रदर्शनकारियों को भावुक कर दिया। आंदोलन में शामिल छात्र और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि लगभग हर दिन उन 21 NEET अभ्यर्थियों का जिक्र करते रहे, जिनका अब निधन हो चुका है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इन छात्रों की मौत NEET पेपर लीक विवाद के बाद हुई, जबकि सरकार की ओर से इस संबंध में ऐसी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद आंदोलन स्थल पर मौजूद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मंच से प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए सबसे पहले उस पोस्टर को मंगवाया, जिस पर दिवंगत NEET अभ्यर्थियों के नाम लिखे गए थे। इसके बाद आंदोलन में मौजूद लोगों ने इन छात्रों को श्रद्धांजलि दी और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग दोहराई।

प्रदर्शनकारियों का दावा, सरकार ने नहीं की आधिकारिक पुष्टि

जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे छात्रों और संगठनों का दावा है कि जिन 21 अभ्यर्थियों का वे उल्लेख कर रहे हैं, उन्होंने NEET पेपर लीक विवाद और दोबारा परीक्षा की घोषणा के बाद आत्महत्या की। हालांकि सरकार ने इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। आंदोलनकारी लगातार मांग कर रहे हैं कि इन मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और प्रभावित परिवारों को न्याय मिले।

रेमा बेगम की कहानी बनी आंदोलन का प्रमुख मुद्दा

प्रदर्शनकारियों द्वारा जिन छात्रों का बार-बार उल्लेख किया गया, उनमें रेमा बेगम का नाम भी शामिल है। बताया गया कि वह अपनी बीमार मां के साथ एक दूरदराज गांव में रहती थीं और डॉक्टर बनने का सपना देखती थीं।

कई वर्षों की तैयारी और महंगी कोचिंग के बाद उन्हें विश्वास था कि इस बार वह सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने में सफल होंगी। लेकिन परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र लीक होने की खबर सामने आई और दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया। आंदोलनकारियों के अनुसार, इसी घटनाक्रम के बाद उनकी मानसिक स्थिति प्रभावित हुई और बाद में उनका निधन हो गया।

पिता ने साझा किया बेटी की तैयारी का संघर्ष

समाचार एजेंसी एएफपी से बातचीत में रेमा बेगम के पिता रजऊल इस्लाम ने बताया कि उनकी बेटी को परीक्षा के बाद पूरा भरोसा था कि उसका चयन हो जाएगा। उन्होंने कहा कि दोबारा परीक्षा की घोषणा के बाद वह पहले जैसी नहीं रही और धीरे-धीरे खुद में सिमट गई।

रजऊल इस्लाम ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई के लिए काफी आर्थिक प्रयास किए थे। मछली का कारोबार करने वाले इस्लाम ने उसे दो वर्षों तक बड़े शहरों के कोचिंग संस्थानों में पढ़ाया। उनके अनुसार, बेटी को यह चिंता सताने लगी थी कि उसकी तैयारी और परिवार की मेहनत कहीं व्यर्थ न चली जाए।

प्रदीप मीणा के परिवार ने भी सुनाई अपनी पीड़ा

रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान के किसान राजेश कुमार ने अपने बेटे प्रदीप मीणा की तैयारी के लिए पुश्तैनी जमीन बेच दी और 11 लाख रुपये का कर्ज लिया। उन्होंने बताया कि बेटे की पढ़ाई के लिए उन्होंने लंबे समय तक कठिन मेहनत की, क्योंकि उन्हें विश्वास था कि डॉक्टर बनने के बाद बेटे का भविष्य सुरक्षित होगा।

परिवार के अनुसार परीक्षा के बाद प्रदीप को भरोसा था कि उसका चयन हो जाएगा, लेकिन दोबारा परीक्षा की घोषणा के बाद परिस्थितियां बदल गईं। आंदोलन में इस मामले का भी उल्लेख किया जाता रहा।

उत्तर प्रदेश के ऋतिक मिश्रा का भी हुआ जिक्र

प्रदर्शन के दौरान उत्तर प्रदेश के अभ्यर्थी ऋतिक मिश्रा का नाम भी सामने आया। उनके पिता अनूप कुमार मिश्रा ने बताया कि यह उनके बेटे का तीसरा प्रयास था और परीक्षा के बाद उसने अच्छे प्रदर्शन का भरोसा जताया था। परिवार के अनुसार पेपर लीक की खबर सामने आने के बाद उनके बेटे का निधन हो गया।

दोबारा परीक्षा को छात्रों ने बताया मानसिक रूप से कठिन

जिन अभ्यर्थियों ने दोबारा परीक्षा दी, उनमें से कई छात्रों ने इसे मानसिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण अनुभव बताया। 19 वर्षीय चैतन्य अग्रवाल ने कहा कि पूरी तैयारी के साथ परीक्षा देने के बाद अचानक दोबारा उसी प्रक्रिया से गुजरना मानसिक रूप से थका देने वाला अनुभव होता है।

शिक्षकों का भी मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पहले से ही अत्यधिक तनावपूर्ण होती है और यदि परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं के कारण पूरी प्रक्रिया दोहरानी पड़े तो इसका भावनात्मक प्रभाव और अधिक बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों ने जताई सामाजिक और आर्थिक चिंता

पूर्व प्रोफेसर एवं साहित्यकार जी. एन. देवी ने कहा कि देश में सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश अनेक परिवारों के लिए बेहतर भविष्य और आर्थिक सुरक्षा का माध्यम माना जाता है। उनके अनुसार हर वर्ष लाखों विद्यार्थी सीमित मेडिकल सीटों के लिए कठिन तैयारी करते हैं।

उन्होंने कहा कि कम आय वाले परिवार वर्षों तक आर्थिक और सामाजिक त्याग करके अपने बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करते हैं। ऐसे में यदि प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाएं सामने आती हैं तो अनेक परिवार स्वयं को ठगा हुआ महसूस करते हैं।

अनिता के मामले का भी हुआ उल्लेख

समाचार में तमिलनाडु की छात्रा एस. अनिता का भी उल्लेख किया गया है। बताया गया कि उन्होंने NEET परीक्षा के मुद्दे पर पहले सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उनकी याचिका में कहा गया था कि NEET परीक्षा ग्रामीण क्षेत्रों और राज्य बोर्ड के विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त चुनौतियां पैदा करती है। बाद में उनका भी निधन हो गया।

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे संगठनों और छात्रों ने मांग की कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए, पेपर लीक जैसे मामलों की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही आंदोलनकारियों ने यह भी मांग उठाई कि जिन छात्रों की जान गई, उनके परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।