स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जब भोजन का कोई टुकड़ा गलती से श्वास नली में फंस जाता है और फेफड़ों तक हवा पहुंचने का रास्ता बाधित हो जाता है, तो इस स्थिति को फूड चोकिंग कहा जाता है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें समय पर मदद न मिलने पर व्यक्ति की जान को गंभीर खतरा हो सकता है।

हाल ही में एक युवक की मौत कथित तौर पर कुरकुरे का टुकड़ा गले में फंसने के कारण हो गई। इस घटना ने एक बार फिर फूड चोकिंग यानी भोजन के गले में फंस जाने के खतरे को लेकर चिंता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार खाने का छोटा-सा टुकड़ा भी श्वास नली को पूरी तरह बंद कर सकता है, जिससे कुछ ही मिनटों में स्थिति गंभीर हो सकती है।

क्या होता है फूड चोकिंग

फूड चोकिंग तब होता है जब भोजन या कोई अन्य वस्तु गलती से श्वास नली (एयरवे) में फंस जाती है। इससे फेफड़ों तक हवा पहुंचना रुक सकता है और व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी होने लगती है। यदि समय रहते मदद न मिले तो ऑक्सीजन की कमी के कारण व्यक्ति की जान भी जा सकती है।

कैसे पहचानें कि किसी को चोकिंग हो रही है?

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति अचानक बोलना बंद कर दे, खांस न पा रहा हो, सांस लेने में परेशानी हो रही हो या उसका चेहरा नीला पड़ने लगे, तो यह चोकिंग का संकेत हो सकता है। कई बार पीड़ित अपने गले की ओर इशारा करके मदद मांगने की कोशिश करता है।

ऐसी स्थिति में क्या करें?

डॉक्टरों का कहना है कि चोकिंग की स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाना बेहद जरूरी होता है। अगर व्यक्ति खांस पा रहा है, तो उसे लगातार खांसने के लिए प्रोत्साहित करें। लेकिन यदि सांस पूरी तरह रुक गई हो, तो प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा Heimlich Maneuver (पेट पर दबाव देने की तकनीक) का इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही तुरंत एंबुलेंस या मेडिकल सहायता के लिए संपर्क करना चाहिए।

किन लोगों में ज्यादा होता है खतरा?

फूड चोकिंग का खतरा बच्चों और बुजुर्गों में अधिक देखा जाता है, लेकिन यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। जल्दी-जल्दी खाना, खाते समय हंसना-बोलना, भोजन को ठीक से चबाकर न खाना या नशे की हालत में खाना खाने से जोखिम बढ़ सकता है।

कैसे करें बचाव?

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि भोजन को अच्छी तरह चबाकर खाएं, खाते समय जल्दबाजी न करें और हंसते-बोलते हुए खाना खाने से बचें। बच्चों को छोटे और सुरक्षित टुकड़ों में भोजन दें तथा बुजुर्गों के खाने पर विशेष ध्यान रखें। ऐसी सावधानियां फूंक चोकिंग के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकती हैं।

समय पर मदद बचा सकती है जान

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि चोकिंग एक मेडिकल इमरजेंसी है। सही समय पर पहचान और तुरंत प्राथमिक सहायता मिलने से कई लोगों की जान बचाई जा सकती है। इसलिए हर व्यक्ति को चोकिंग के शुरुआती संकेतों और प्राथमिक उपचार की जानकारी होना जरूरी है।