दुनिया एक बार फिर इबोला वायरस को लेकर सतर्क हो गई है। अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला के नए प्रकोप की पुष्टि हुई है। शुरुआती जेनेटिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि वायरस कई हफ्तों, संभवतः कई महीनों से चुपचाप फैल रहा था। यही वजह है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस नए स्ट्रेन को लेकर विशेष निगरानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, फिलहाल इस नए स्ट्रेन के व्यवहार, संक्रमण क्षमता और इसके प्रभाव को लेकर कई सवालों के जवाब सामने आने बाकी हैं। ऐसे में दुनिया के कई देशों की तरह भारत में भी लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इबोला का यह नया प्रकोप चिंता का विषय बन सकता है।
कैसे फैलता है इबोला वायरस?
इबोला उन वायरसों में शामिल नहीं है जो कोरोना की तरह हवा के जरिए तेजी से फैलते हैं। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के खून, लार, पसीने, यूरिन, मल या अन्य शारीरिक द्रवों के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। यही कारण है कि मरीजों की देखभाल करने वाले स्वास्थ्यकर्मी और उनके करीबी लोगों में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है।
इबोला पर लंबे समय से शोध कर रहे विशेषज्ञों का कहना है कि वायरस का संक्रमण आमतौर पर सीधे संपर्क से होता है, इसलिए संक्रमित व्यक्ति की पहचान और समय पर आइसोलेशन बेहद महत्वपूर्ण होता है।
शरीर पर कैसे करता है हमला?
वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद सबसे पहले इम्यून सिस्टम को निशाना बनाता है। यह उन कोशिकाओं पर हमला करता है जो सामान्य परिस्थितियों में शरीर को संक्रमण से बचाने का काम करती हैं। धीरे-धीरे वायरस खून के माध्यम से शरीर के अलग-अलग अंगों तक पहुंच जाता है और उनकी कार्यप्रणाली को प्रभावित करने लगता है।
जब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ने लगती है, तब वायरस तेजी से फैलता है और बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
शुरुआती लक्षणों से पहचानना क्यों मुश्किल?
इबोला की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके शुरुआती लक्षण सामान्य बीमारियों से मिलते-जुलते हैं। संक्रमित व्यक्ति को शुरुआत में बुखार, सिरदर्द, कमजोरी, बदन दर्द या मलेरिया जैसी शिकायतें हो सकती हैं। कई बार मरीज को कुछ समय के लिए राहत भी महसूस होती है, जिससे बीमारी की गंभीरता का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है।
हालांकि, बीमारी बढ़ने पर स्थिति गंभीर हो सकती है और कुछ मामलों में शरीर के विभिन्न हिस्सों से ब्लीडिंग जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। इसी चरण में संक्रमण फैलने का जोखिम भी अधिक माना जाता है।
भारत को कितना चिंतित होना चाहिए?
फिलहाल भारत में इबोला वायरस का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय आबादी के लिए अभी सीधा खतरा काफी कम है। देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर स्क्रीनिंग व्यवस्था, स्वास्थ्य निगरानी तंत्र और बड़े अस्पतालों में जांच सुविधाएं संभावित मामलों की पहचान करने में सक्षम हैं।
हाल ही में युगांडा से बेंगलुरु पहुंची 28 वर्षीय एक महिला में इबोला जैसे लक्षण दिखाई देने के बाद उसे एहतियातन अस्पताल में आइसोलेट किया गया था। हालांकि, बाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) की जांच में उसकी रिपोर्ट इबोला वायरस के लिए नेगेटिव आई, जिससे राहत मिली। वहीं, अफ्रीका के कुछ हिस्सों में इबोला के हालिया प्रकोप को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अलर्ट जारी किया है। इसके बाद भारत का केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय भी पूरी तरह सतर्क हो गया है और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्कता और निगरानी बनाए रखना बेहद जरूरी है।
