भारतीय संगीत जगत से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने करोड़ों संगीत प्रेमियों की आंखें नम कर दी हैं। 60 और 70 के दशक की मशहूर पार्श्व गायिका Suman Kalyanpur अब हमारे बीच नहीं रहीं। 89 साल की उम्र में उन्होंने मुंबई में अंतिम सांस ली। उनकी मीठी, सादगी भरी और दिल को छू लेने वाली आवाज़ ने दशकों तक लोगों के दिलों पर राज किया।
कहा जाता है कि उनकी आवाज़ इतनी मधुर थी कि कई बार लोग उनके गानों को लता मंगेशकर का गीत समझ बैठते थे। लेकिन सुमन कल्याणपुर ने अपनी अलग पहचान बनाई और संगीत की दुनिया में अपना नाम हमेशा के लिए अमर कर दिया।
कौन थीं सुमन कल्याणपुर?
सुमन कल्याणपुर का जन्म 28 जनवरी 1937 को तत्कालीन ब्रिटिश भारत के Dhaka में हुआ था। बाद में उनका परिवार मुंबई आ गया और यहीं से उनकी संगीत यात्रा शुरू हुई। बचपन से ही उन्हें संगीत और कला दोनों में रुचि थी।
उनका पहला गाना
सुमन कल्याणपुर ने 1950 के दशक में फिल्मों के लिए गाना शुरू किया था। शुरुआती दौर में उन्होंने कई छोटे-बड़े प्रोजेक्ट्स में अपनी आवाज़ दी और धीरे-धीरे संगीतकारों की पसंद बन गईं। उनका शुरुआती चर्चित गीत फिल्म Darwaza से माना जाता है, जिसके बाद उनका करियर तेजी से आगे बढ़ा।
सबसे मशहूर गाने
उनकी आवाज़ में वो मिठास थी जो सीधे दिल में उतर जाती थी। उनके कुछ सबसे लोकप्रिय गीत:
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे, ना ना करते प्यार तुम्हीं से, तुमने पुकारा और हम चले आए, दिल एक मंदिर है, मेरे महबूब ना जा, परबतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है, अजहूँ न आए बालमा, ये किसने गीत छेड़ा, ठहरिए होश में आ लूं, चांद फिर निकला मगर तुम न आए, बहना ने भाई की कलाई से प्यार बांधा है, न तुम हमें जानो, दिल ग़म से जल रहा है, मुझे ये फूल ना दे, हमने तो प्यार किया
मोहम्मद रफ़ी के साथ बनी सुपरहिट जोड़ी
सुमन कल्याणपुर और Mohammed Rafi की जोड़ी को हिंदी फिल्म संगीत की सबसे खूबसूरत जोड़ियों में गिना जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने रफ़ी साहब के साथ 140 से ज्यादा डुएट रिकॉर्ड किए थे।
उनकी सबसे बड़ी पहचान
जिस दौर में Lata Mangeshkar और Asha Bhosle का दबदबा था, उस समय सुमन कल्याणपुर ने अपनी अलग जगह बनाई। उनकी आवाज़ की तुलना अक्सर लता जी से की जाती थी, लेकिन उन्होंने हमेशा अपनी सादगी और प्रतिभा से लोगों का दिल जीता।
संगीत जगत में शोक की लहर
सुमन कल्याणपुर के निधन के बाद संगीत प्रेमी सोशल मीडिया पर उन्हें याद कर रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि "एक ऐसा दौर खत्म हो गया, जिसकी आवाज़ें कभी बूढ़ी नहीं होतीं।"
कब हुआ निधन?
31 मई 2026 की शाम करीब 8 बजे मुंबई के लोखंडवाला स्थित उनके घर में उनका निधन हो गया। वे उम्र संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं। बताया गया कि अंतिम दिनों में वे अपने ही पुराने गाने सुन रही थीं।
