नवीदुल हसन

ट्रंप का बड़ा फैसला: अमेरिका 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बाहर निकलेगा, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियां भी शामिल

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक सहयोग से दूरी बनाते हुए बड़ा फैसला लिया है। ट्रंप प्रशासन ने 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों और एजेंसियों से अमेरिका को अलग करने का निर्णय किया है। इनमें संयुक्त राष्ट्र (UN) से जुड़ी कई अहम एजेंसियां, आयोग और सलाहकार पैनल शामिल हैं।

राष्ट्रपति ट्रंप ने 7 जनवरी 2026 को एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत इन संगठनों को दी जा रही अमेरिकी मदद और भागीदारी को निलंबित कर दिया गया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह फैसला सभी अंतरराष्ट्रीय संगठनों की भूमिका और फंडिंग की समीक्षा के बाद लिया गया है।

ज्यादातर वे संगठन निशाने पर हैं जो जलवायु परिवर्तन, श्रम अधिकार, जनसंख्या, विविधता (Diversity) और तथाकथित “वोक” (Woke) मुद्दों पर काम करते हैं। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि ये संस्थाएं या तो गैर-जरूरी हैं, सही तरीके से नहीं चलाई जा रहीं, अमेरिकी पैसे की बर्बादी कर रही हैं या फिर अमेरिका की संप्रभुता और हितों के खिलाफ काम कर रही हैं।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा कि कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं अब अमेरिका के लिए बेकार, दोहराव वाली और गलत तरीके से संचालित हो चुकी हैं, इसलिए उनसे दूरी बनाना जरूरी है।

इस फैसले के तहत अमेरिका यूएन फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC) से भी बाहर हो रहा है, जो जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक बातचीत की नींव है और पेरिस जलवायु समझौते का आधार भी है। ट्रंप पहले ही पेरिस समझौते से अमेरिका को बाहर कर चुके हैं और जलवायु परिवर्तन को “धोखा” बताते रहे हैं।

इसके अलावा, अमेरिका ने भारत और फ्रांस की अगुवाई वाले इंटरनेशनल सोलर एलायंस से भी खुद को अलग कर लिया है, जिसकी शुरुआत 2015 में पेरिस में हुई थी।

अमेरिका संयुक्त राष्ट्र की जनसंख्या एजेंसी (UNFPA) से भी बाहर हो रहा है, जो दुनिया भर में महिलाओं और लड़कियों के यौन और प्रजनन स्वास्थ्य पर काम करती है। ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी लंबे समय से इस एजेंसी का विरोध करते रहे हैं। हालांकि, जो बाइडन सरकार के दौरान इस एजेंसी को फिर से फंडिंग दी गई थी और जांच में आरोप सही नहीं पाए गए थे।

इससे पहले भी ट्रंप प्रशासन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), यूएन मानवाधिकार परिषद, यूनेस्को और फलस्तीन शरणार्थी एजेंसी (UNRWA) से दूरी बना चुका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के इस फैसले से जलवायु परिवर्तन से निपटने और वैश्विक सहयोग को बड़ा झटका लग सकता है, क्योंकि अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े प्रदूषकों और आर्थिक शक्तियों में से एक है।

हालांकि, ट्रंप प्रशासन का कहना है कि वह संयुक्त राष्ट्र से पूरी तरह अलग नहीं हो रहा, बल्कि सिर्फ उन्हीं संस्थाओं में निवेश करेगा जहां अमेरिका का सीधा फायदा हो और जहां चीन जैसी ताकतों से प्रतिस्पर्धा हो सके।