
बिहार के किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड के भोगडावर पंचायत निवासी मौलाना मो० तौसीफ रज़ा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। बताया जा रहा है कि वे 26 अप्रैल 2026 को बरेली में उर्स-ए-ताजुश्शरिया में शामिल होकर ट्रेन संख्या 04314 (ऋषिकेश एक्सप्रेस) से सिवान लौट रहे थे। इसी दौरान कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा उनके साथ मारपीट और लूटपाट का प्रयास किया गया, जिसकी जानकारी उन्होंने अपनी पत्नी को फोन पर दी थी। इसके बाद उनका संपर्क टूट गया और बाद में उनका शव बरेली कैंट स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक किनारे संदिग्ध अवस्था में बरामद हुआ। इस घटना को लेकर जहां प्रशासन इसे दुर्घटना बता रहा है, वहीं परिजन इसे सुनियोजित हत्या का मामला बता रहे हैं, जिससे पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया है।
ठाकुरगंज में कैंडल मार्च, डॉ. आसिफ सईद के नेतृत्व में उमड़ा जनसैलाब
इस घटना के विरोध में किशनगंज जिले के ठाकुरगंज में गुस्सा साफ तौर पर देखने को मिला। डॉ. आसिफ सईद साहब के नेतृत्व में “We Care Thakurganj” के बैनर तले एक विशाल कैंडल मार्च का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए। शाम ढलते ही लोग हाथों में मोमबत्तियां लेकर सड़कों पर उतर आए और मौलाना तौसीफ रज़ा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए इंसाफ की मांग करने लगे। पूरे इलाके में “हमें इंसाफ चाहिए” और “दोषियों को सजा दो” जैसे नारों की गूंज सुनाई दी, जिसने इस बात को साफ कर दिया कि लोगों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है।
अख्तरुल ईमान समेत नेताओं की मौजूदगी, जांच की मांग तेज
इस कैंडल मार्च में अख्तरुल ईमान की विशेष उपस्थिति रही, जिससे इस आंदोलन को और मजबूती मिली। उनके साथ AIMIM के विधायक, पार्टी कार्यकर्ता और अन्य जनप्रतिनिधि भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। नेताओं ने इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि समाज की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इस मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आए और दोषियों को कड़ी सजा मिल सके।
परिवार पर संकट, मुआवजा और नौकरी की मांग
मौलाना तौसीफ रज़ा के निधन के बाद उनका परिवार गहरे आर्थिक संकट में आ गया है। वे सिवान में इमामत कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे और उनकी आय ही घर का मुख्य सहारा थी। अब उनके असामयिक निधन के बाद परिवार के सामने आजीविका का कोई स्थायी साधन नहीं बचा है। स्थानीय लोगों और परिजनों ने मानवीय आधार पर पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा देने और उनकी पत्नी को सरकारी नौकरी प्रदान करने की मांग भी उठाई है, ताकि परिवार को सहारा मिल सके।
फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर जांच की मांग तेज हो गई है। एक तरफ प्रशासन इसे दुर्घटना मान रहा है, वहीं दूसरी ओर परिजन और स्थानीय लोग इसे सुनियोजित हत्या बता रहे हैं। ऐसे में अब सबकी नजर जांच पर टिकी है कि आखिर मौलाना तौसीफ रज़ा की मौत के पीछे की सच्चाई क्या है और क्या उन्हें न्याय मिल पाएगा।
