पंजाब में Aam Aadmi Party (AAP) इन दिनों राजनीतिक दबाव और अंदरूनी हलचल के दौर से गुजर रही है। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं और राज्यसभा सांसदों के दल बदलने के बाद संगठन में टूट की आशंका तेज हो गई है। इसी स्थिति को संभालने के लिए मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए कई बड़े फैसले लिए हैं।
मामले की शुरुआत तब हुई जब AAP को संसद में बड़ा झटका लगा और उसके कुछ राज्यसभा सदस्य पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल हो गए। इससे न सिर्फ पार्टी की संसदीय ताकत कमजोर हुई, बल्कि पंजाब इकाई में भी असंतोष की चर्चाएं तेज हो गईं। राजनीतिक गलियारों में यह भी कहा जा रहा है कि कुछ विधायक भी संपर्क में हैं, जिससे आने वाले समय में और दलबदल की आशंका जताई जा रही है।
इसी खतरे को देखते हुए भगवंत मान ने संगठन को एकजुट रखने के लिए जालंधर में पार्टी विधायकों और वरिष्ठ नेताओं की अहम बैठक बुलाने का फैसला किया है। इस बैठक में विधायकों की वफादारी सुनिश्चित करने, अंदरूनी नाराजगी दूर करने और भविष्य की रणनीति तय करने पर जोर रहेगा। इसके साथ ही, मान ने पार्टी छोड़ने वाले सांसदों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें वापस बुलाने (recall) की मांग उठाने की भी तैयारी की है।
पार्टी नेतृत्व का दावा है कि पंजाब में AAP पूरी तरह एकजुट है और सभी विधायक सरकार के साथ खड़े हैं। नेताओं का कहना है कि टूट की खबरें विपक्ष द्वारा फैलाई जा रही अफवाह हैं और सरकार का फोकस केवल विकास कार्यों पर है।
वहीं, विपक्षी दलों का आरोप है कि AAP के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और आने वाले समय में और नेता पार्टी छोड़ सकते हैं।
कुल मिलाकर, पंजाब में AAP इस समय “डैमेज कंट्रोल मोड” में नजर आ रही है। अब यह देखना अहम होगा कि भगवंत मान के ये कदम संगठन को स्थिरता दे पाते हैं या राजनीतिक संकट और गहराता है।
