महताब नोमानी:

पंजाब निकाय चुनाव के नतीजों में आम आदमी पार्टी ने जबरदस्त सफलता हासिल की है। पंजाब राज्य चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार आम आदमी पार्टी ने कुल 1977 वार्डों में से 958 वार्ड जीते हैं। कांग्रेस ने 457 वार्ड जीतकर दूसरे स्थान पर रही, जबकि शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने 191 वार्ड और भाजपा ने 172 वार्ड जीते हैं। वहीं शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए 251 वार्ड जीते हैं।

शुक्रवार को आए नतीजों में कुल आठ नगर निगमों में से पांच पर आम आदमी पार्टी ने एकतरफा कब्जा जमा लिया है। इस बंपर जीत के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव का ट्रेलर बताया। चुनावों के इस नतीजे के बाद आम आदमी पार्टी कार्यालय में खुशी का माहौल है, वहीं विपक्षी दल चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगा रहे हैं।

अगर आंकड़ों के हिसाब से समझें तो पंजाब में कुल आठ नगर निगमों, 75 नगर काउंसिलों और 20 नगर कमेटियों के लिए वोट डाले गए थे। इनमें से आठ नगर निगमों के नतीजों को देखें तो आम आदमी पार्टी ने मोहाली, बरनाला, बटाला, मोगा और बठिंडा समेत पांच जगहों पर कब्जा जमा लिया है। वहीं कांग्रेस ने कपूरथला नगर निगम में बाज़ी मारी है, जबकि भाजपा ने अबोहर में पूर्ण बहुमत हासिल किया है। इसके अलावा आम आदमी पार्टी ने नगर काउंसिल की 75 में से 45 सीटों पर अपना दबदबा कायम किया है।

इस बड़ी चुनावी जीत के बाद आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि आज पंजाब के शहरों से भाजपा का बिल्कुल सफाया हो गया है। इसके बाद उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से भाजपा ने ईडी का इस्तेमाल करके पूरे पंजाब के छोटे-छोटे दुकानदारों, आम व्यापारियों और हिंदू व्यापारियों को जिस तरह डराया-धमकाया और परेशान किया, आज जनता ने वोट की चोट से उसका जवाब दे दिया है।

साथ ही केजरीवाल ने कहा कि सभी पंजाब के व्यापारियों को सचेत करना चाहता हूं कि इस करारी हार के बाद भाजपा आने वाले दिनों में और ज्यादा छापेमारी की प्लानिंग कर सकती है। इसके अलावा मनीष सिसोदिया और संजय सिंह ने पंजाब के लोगों का धन्यवाद दिया है।

हालांकि, आम आदमी पार्टी भले ही इस समय जश्न मना रही है, लेकिन राजनीतिक जानकार इन नतीजों को 2027 के विधानसभा चुनाव का पैमाना नहीं मान रहे हैं। पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रोफेसर कुलदीप सिंह ने इस बारे में बात करते हुए कहा कि स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजे राज्य के मुख्य चुनाव से बिल्कुल अलग हैं। उन्होंने इतिहास का उदाहरण देते हुए समझाया कि साल 2021 के निकाय चुनाव में कांग्रेस को बंपर जीत मिली थी, लेकिन विधानसभा चुनाव में वह बुरी तरह हार गई थी। इसी तरह अकाली दल 2015 में निकाय चुनाव जीती, लेकिन 2017 में सत्ता गंवा दी थी।