राजस्थान के मरुस्थलीय इलाकों में शनिवार को प्रकृति का ऐसा भयावह रूप देखने को मिला, जिसने लोगों को हैरान कर दिया। चूरू और श्रीगंगानगर जिलों में अचानक मौसम ने करवट ली और देखते ही देखते आसमान में रेत का विशाल गुबार छा गया। हालात ऐसे बन गए कि दोपहर के समय ही रात जैसा अंधेरा महसूस होने लगा। धूल और रेत की घनी परत ने सूरज को पूरी तरह ढक लिया, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।


दिन में छा गया रात जैसा अंधेरा

शनिवार दोपहर करीब 2 बजे अचानक तेज हवाओं के साथ धूल और रेत का विशाल बवंडर उठना शुरू हुआ। कुछ ही मिनटों में रेत की एक ऊंची दीवार पूरे इलाके में फैल गई और दृश्यता लगभग शून्य के करीब पहुंच गई।

सड़कों पर चल रहे वाहन रुकने को मजबूर हो गए। कई वाहन चालकों ने अपनी हेडलाइट्स जला लीं ताकि वे कुछ मीटर आगे तक देख सकें। लोगों ने इस नजारे को किसी प्राकृतिक आपदा जैसा बताया, क्योंकि दिन के उजाले में चारों तरफ घना अंधेरा छा गया था।


70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चला बवंडर

मौसम विभाग और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह कोई सामान्य आंधी नहीं थी। इस दौरान हवाओं की गति करीब 70 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई। रेत का यह विशाल बवंडर लगभग 30 मिनट तक लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहा।

तेज हवाओं और उड़ती रेत के कारण लोगों को अपने घरों के दरवाजे और खिड़कियां बंद करनी पड़ीं। कई इलाकों में लोग घरों के भीतर रहने को मजबूर हो गए, जबकि बाहर का माहौल पूरी तरह धूल और रेत से भर गया था।


बवंडर के बाद बारिश ने दी राहत

रेतीले तूफान के शांत होने के बाद मौसम ने एक और करवट ली। आसमान में घने बादल छा गए और कई इलाकों में हल्की से तेज बारिश शुरू हो गई। इस बदलाव ने भीषण गर्मी से जूझ रहे लोगों को बड़ी राहत पहुंचाई।

मौसम विभाग के अनुसार, आंधी और बारिश के बाद तापमान में करीब 8 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई। पिछले कई दिनों से 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच रहा पारा अचानक नीचे आ गया, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली।

रेगिस्तान की हवा जब अपना रंग बदलती है...

तो कभी सूरज को छिपा देती है,

और कभी गर्मी को ही उड़ा ले जाती है।