पुणे के खडकवासला स्थित नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) की 150वीं पासिंग आउट परेड में थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी का संबोधन केवल नए सैन्य अधिकारियों के लिए प्रेरणादायक भाषण नहीं था, बल्कि भारत की बदलती सुरक्षा नीति और सैन्य सोच का स्पष्ट संकेत भी था। उन्होंने कहा कि अगर देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए जरूरत पड़ी तो भारतीय सेनाएं “ऑपरेशन सिंदूर 2.0” के लिए पूरी तरह तैयार हैं। सेना प्रमुख ने मई 2025 में आतंकवादी ढांचों के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर को भारत की सैन्य क्षमता, राजनीतिक इच्छाशक्ति और संयुक्त युद्ध कौशल का नया बेंचमार्क बताया। उनके इस बयान को केवल एक सैन्य टिप्पणी नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीतिक तैयारियों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

ऑपरेशन सिंदूर क्यों बना नई सैन्य नीति का प्रतीक?

जनरल द्विवेदी ने अपने संबोधन में ऑपरेशन सिंदूर का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल एक सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि भारत के नए सुरक्षा दृष्टिकोण का उदाहरण था। इस ऑपरेशन ने दिखाया कि देश अब आतंकवाद और सीमा पार से होने वाले खतरों के प्रति केवल प्रतिक्रिया देने की नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर सटीक और निर्णायक कार्रवाई करने में भी सक्षम है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस अभियान की सबसे बड़ी सफलता इसकी योजना, लक्ष्य चयन और संयुक्त संचालन क्षमता थी। ऑपरेशन के दौरान सेना, वायुसेना और नौसेना ने एकीकृत तरीके से काम किया, जिससे यह आधुनिक युद्धक रणनीति का उदाहरण बन गया। सेना प्रमुख का कहना था कि आने वाली पीढ़ी के सैन्य अधिकारियों को इसी स्तर की तैयारी, समन्वय और दृढ़ता को आगे बढ़ाना होगा।


युद्ध का मैदान बदल चुका है, करना पर सकता है चुनौतियों का सामना

अपने भाषण में जनरल द्विवेदी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आज का युद्ध पारंपरिक युद्ध से पूरी तरह अलग है। उन्होंने कहा कि अब खतरे केवल सीमाओं पर खड़े दुश्मनों से नहीं आते, बल्कि साइबर हमलों, दुष्प्रचार अभियानों, आर्थिक दबाव, ड्रोन तकनीक और हाइब्रिड वॉरफेयर के रूप में भी सामने आते हैं। आधुनिक समय में दुश्मन हमेशा वर्दी में दिखाई नहीं देता और कई बार लड़ाई बिना औपचारिक युद्ध घोषित हुए भी लड़ी जाती है। ऐसे माहौल में सैन्य अधिकारियों को केवल शारीरिक रूप से मजबूत नहीं, बल्कि तकनीकी रूप से दक्ष और रणनीतिक रूप से तेज होना होगा। सेना प्रमुख ने कैडेट्स को बताया कि आने वाले वर्षों में निर्णय लेने की गति, तकनीकी समझ और सूचना युद्ध को समझना उतना ही महत्वपूर्ण होगा जितना हथियार चलाना।


तीनों सेनाओं की एकता ही भारत की सबसे बड़ी ताकत

सेना प्रमुख ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का श्रेय तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल को दिया। उन्होंने कहा कि NDA में शुरू से ही कैडेट्स को ‘जॉइंटनेस’ यानी संयुक्त सैन्य संस्कृति का प्रशिक्षण दिया जाता है और यही भविष्य की युद्ध रणनीति की नींव है। आज दुनिया भर में युद्ध का स्वरूप बदल रहा है और कोई भी सेना अकेले बड़ी सफलता हासिल नहीं कर सकती। भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना का समन्वय ही भारत की वास्तविक ताकत है। उन्होंने कहा कि भविष्य के अधिकारी चाहे किसी भी शाखा में जाएं, उन्हें एक साझा राष्ट्रीय मिशन के तहत काम करना होगा। यही कारण है कि भारतीय सशस्त्र बल अब संयुक्त कमांड, साझा रणनीति और तकनीकी एकीकरण पर अधिक जोर दे रहे हैं।


नए कैडेट्स के लिए जिम्मेदारी और संदेश

अपने संबोधन के अंत में जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पासिंग आउट कर रहे कैडेट्स को याद दिलाया कि वे ऐसे दौर में सेना का हिस्सा बन रहे हैं जब भारत की सुरक्षा चुनौतियां तेजी से बदल रही हैं। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियान केवल सैन्य उपलब्धियां नहीं हैं, बल्कि वे उस जिम्मेदारी की याद दिलाते हैं जिसे हर नए अधिकारी को आगे बढ़ाना है। सेना प्रमुख का संदेश साफ था कि भारत की सशस्त्र सेनाएं हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं, लेकिन भविष्य की सफलता नई पीढ़ी के अधिकारियों की क्षमता, नेतृत्व और समर्पण पर निर्भर करेगी। NDA की इस परेड से निकला सबसे बड़ा संदेश यही था कि भारत अपनी सुरक्षा को लेकर पहले से अधिक आत्मविश्वासी, आधुनिक और तैयार नजर आ रहा है।