अगर कोई आपसे कहे कि एक ऐसा आलू भी है जिसकी कीमत में सोने की चेन खरीदी जा सकती है, तो शायद आप यकीन नहीं करेंगे। लेकिन आज अंतरराष्ट्रीय आलू दिवस पर बिहार से सामने आई एक रिपोर्ट ने हर किसी को चौंका दिया है। बिहार का एक जिला ऐसा है जहां लोग हर साल करीब 456 करोड़ रुपये का आलू खा जाते हैं। हैरानी की बात यह है कि इसी चर्चा के बीच दुनिया के सबसे महंगे आलू "ली बोनॉट" का नाम भी सुर्खियों में आ गया है, जिसकी कीमत 56 हजार रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी है। आखिर कौन सा है यह जिला, क्यों बढ़ रही है आलू की खपत और क्या है 56 हजार वाले आलू का रहस्य? जानिए पूरी कहानी।

भागलपुर में आलू का ऐसा क्रेज, हर साल 456 करोड़ रुपये की खपत

बिहार का भागलपुर जिला इन दिनों आलू को लेकर चर्चा में है। अंतरराष्ट्रीय आलू दिवस के मौके पर सामने आए आंकड़ों के मुताबिक जिले में हर महीने लगभग 38 से 40 करोड़ रुपये का आलू बिक जाता है। सालभर का हिसाब जोड़ें तो यह आंकड़ा 456 करोड़ रुपये से भी ज्यादा पहुंच जाता है। यह केवल एक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। सुबह के नाश्ते से लेकर रात के खाने तक, आलू लगभग हर घर की थाली में मौजूद रहता है। यही वजह है कि इसकी मांग लगातार बढ़ती जा रही है।

उत्पादन भी भारी, फिर भी बाहर से मंगाना पड़ता है आलू

भागलपुर में आलू की खेती बड़े पैमाने पर होती है। जिले के सबौर, नाथनगर, पीरपैंती, गोराडीह, शाहकुंड, सन्हौला और नवगछिया जैसे इलाकों में हर साल करीब 1165 हेक्टेयर भूमि पर आलू की खेती की जाती है। यहां से लगभग 46 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा आलू का उत्पादन होता है। इसके बावजूद स्थानीय मांग इतनी ज्यादा है कि उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से बड़ी मात्रा में आलू मंगवाना पड़ता है। रोजाना करीब 25 ट्रक आलू भागलपुर की मंडियों में पहुंचते हैं, तब जाकर बाजार की जरूरत पूरी हो पाती है।

आखिर क्या है 56 हजार रुपये किलो वाले आलू का राज?

अब बात उस आलू की जिसने पूरी खबर में सबसे ज्यादा सस्पेंस पैदा किया है। इस खास आलू का नाम है "ली बोनॉट" (Le Bonnotte)। इसे दुनिया का सबसे महंगा आलू माना जाता है। इसकी कीमत लगभग 56 हजार रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी है। खास बात यह है कि यह आलू साल में सिर्फ कुछ दिनों के लिए बाजार में उपलब्ध होता है। इसकी खेती फ्रांस के एक छोटे से द्वीप पर बेहद सीमित मात्रा में की जाती है। समुद्री शैवाल की खाद और खास मौसम में तैयार होने वाला यह आलू स्वाद में हल्का नमकीन माना जाता है। बड़े-बड़े लग्जरी होटल इसके इस्तेमाल से सलाद, सूप और प्रीमियम डिश तैयार करते हैं।

350 साल पहले भारत आया था आलू, आज बन गया रसोई का राजा

इतिहासकारों के अनुसार आलू को करीब 350 से 400 साल पहले पुर्तगाली व्यापारियों और ब्रिटिश मिशनरियों के जरिए भारत लाया गया था। दक्षिण अमेरिका के एंडीज पर्वत क्षेत्र से निकलकर यह फसल आज भारतीय रसोई का सबसे बड़ा हिस्सा बन चुकी है। चाहे समोसा हो, पराठा हो, दम आलू हो या फिर चिप्स आलू हर रूप में लोगों की पसंद बना हुआ है। यही कारण है कि भारत आज दुनिया के सबसे बड़े आलू उपभोक्ताओं और उत्पादकों में शामिल है।

आलू सिर्फ स्वाद नहीं, सेहत का भी खजाना

विशेषज्ञों का कहना है कि आलू केवल स्वाद बढ़ाने वाली सब्जी नहीं है, बल्कि यह पोषण का भी बड़ा स्रोत है। इसमें पोटैशियम, विटामिन-सी, फाइबर और ऊर्जा भरपूर मात्रा में मिलती है। कम वसा और ज्यादा पोषक तत्वों की वजह से इसे संतुलित आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यही वजह है कि दुनिया भर में आलू की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। एक तरफ बिहार का भागलपुर जहां हर साल 456 करोड़ रुपये का आलू खा रहा है, वहीं दूसरी तरफ 56 हजार रुपये किलो वाला "ली बोनॉट" आलू लोगों की जिज्ञासा बढ़ा रहा है। अंतरराष्ट्रीय आलू दिवस पर सामने आई यह रिपोर्ट बताती है कि आलू सिर्फ एक सब्जी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की जिंदगी और अर्थव्यवस्था से जुड़ा हुआ एक बड़ा हिस्सा बन चुका है।