देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े एक बेहद संवेदनशील मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और महाराष्ट्र में एक साथ बड़े पैमाने पर छापेमारी कर संभावित आतंकी नेटवर्क पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जांच एजेंसियों के अनुसार यह मामला केवल हथियार तस्करी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार पाकिस्तान से संचालित उन नेटवर्कों से जुड़े बताए जा रहे हैं जो पिछले कुछ वर्षों में ड्रोन तकनीक के जरिए भारत में हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री पहुंचाने की कोशिश करते रहे हैं। NIA की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब सुरक्षा एजेंसियां लगातार चेतावनी देती रही हैं कि सीमा पार बैठे आतंकी संगठन पारंपरिक घुसपैठ के बजाय अब ड्रोन और डिजिटल नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं।
ड्रोन बना नया हथियार, सीमा पार से भेजे जा रहे थे घातक सामान
जांच के केंद्र में पाकिस्तान से जुड़े ऑपरेटिव जसवीर चौधरी और उसके कथित भारतीय सहयोगियों का नेटवर्क है। एजेंसियों का आरोप है कि इस नेटवर्क ने भारत-पाकिस्तान सीमा के रास्ते ड्रोन का इस्तेमाल कर हथियारों, कारतूसों, विस्फोटकों और आईईडी की खेप भारत में पहुंचाने की साजिश रची। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन के जरिए तस्करी सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती बनकर उभरी है क्योंकि यह तरीका पारंपरिक सीमा निगरानी को चकमा देने में सक्षम माना जाता है। पंजाब और जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई बार ड्रोन के जरिए हथियार गिराए जाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इसी तरह के नेटवर्क का विस्तार देश के अन्य राज्यों तक भी किया जा रहा था।
चार राज्यों में छापेमारी, डिजिटल सबूतों पर खास नजर
NIA की टीमें उत्तर प्रदेश के पांच, राजस्थान और बिहार के दो-दो तथा महाराष्ट्र के तीन ठिकानों पर तलाशी अभियान चला रही हैं। जांच के दौरान मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, बैंकिंग रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधियों और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म से जुड़े डिजिटल सबूतों को खंगाला जा रहा है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नेटवर्क के सदस्य एक-दूसरे से किस तरह संपर्क में थे, फंडिंग कहां से हो रही थी और हथियारों की खेप देश के किन हिस्सों तक पहुंचाई जानी थी। सूत्रों के अनुसार शुरुआती जांच में कई ऐसे लिंक सामने आए हैं जो इस नेटवर्क को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय तत्वों से जोड़ सकते हैं।
सिरसा ग्रेनेड हमला जांच ने बढ़ाई चिंता
इसी दौरान NIA ने हरियाणा के सिरसा महिला थाना ग्रेनेड हमले मामले में भी बड़ी कार्रवाई करते हुए दो पाकिस्तानी नागरिकों समेत नौ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। जांच में दावा किया गया है कि पाकिस्तान स्थित गैंगस्टर से आतंकी बने शाहजाद भट्टी के निर्देश पर भारत में पुलिस प्रतिष्ठानों और सुरक्षा संस्थानों को निशाना बनाने की योजना तैयार की गई थी। एजेंसी का कहना है कि सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को प्रभावित कर इस नेटवर्क से जोड़ा गया। इससे यह संकेत मिलता है कि आतंकी संगठनों की रणनीति अब केवल हथियार पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि ऑनलाइन कट्टरपंथ और स्थानीय मॉड्यूल तैयार करने पर भी केंद्रित है।
सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला भारत की सुरक्षा व्यवस्था के सामने उभर रही नई चुनौतियों की तस्वीर पेश करता है। ड्रोन तकनीक, डिजिटल कम्युनिकेशन और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्किंग ने आतंकवादी संगठनों के काम करने के तरीकों को बदल दिया है। यही वजह है कि NIA, खुफिया एजेंसियां और राज्य पुलिस अब तकनीकी निगरानी, साइबर इंटेलिजेंस और अंतरराज्यीय समन्वय पर पहले से अधिक जोर दे रही हैं। ताजा छापेमारी को इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य केवल आरोपियों को पकड़ना नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचकर भविष्य में किसी भी संभावित आतंकी साजिश को समय रहते नाकाम करना है।
