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देश के कई बड़े शहर पहले से ही पानी की कमी की मार झेल रहे हैं और आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। मुंबई के जलाशयों में सिर्फ करीब एक महीने का पानी बचा है, जबकि दिल्ली के कई इलाकों में 15 से 20 दिनों तक नियमित जलापूर्ति नहीं होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। चेन्नई में फिलहाल पेयजल का पर्याप्त भंडार मौजूद है, लेकिन लगातार गिरता भूजल स्तर और बढ़ती औद्योगिक गतिविधियां चिंता बढ़ा रही हैं। इसी बीच वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने चेतावनी दी है कि यदि भारत ने जल प्रबंधन, जल संरक्षण और संसाधनों के संतुलित उपयोग पर तुरंत ध्यान नहीं दिया, तो दिल्ली, मुंबई, चेन्नई समेत कई बड़े शहर भविष्य में गंभीर जल संकट का सामना कर सकते हैं। एजेंसी का कहना है कि बढ़ती आबादी, कृषि क्षेत्र में अत्यधिक पानी की खपत, डेटा सेंटर और AI उद्योगों की बढ़ती मांग, साथ ही जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियां देश के जल संसाधनों पर अभूतपूर्व दबाव बना रही हैं। ऐसे में पानी का संकट केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, उद्योग और आम लोगों के जीवन से जुड़ा बड़ा खतरा बनता जा रहा है।
कृषि से लेकर AI उद्योग तक, हर क्षेत्र बढ़ा रहा पानी की मांग
मूडीज के अनुसार भारत में उपलब्ध मीठे पानी का सबसे बड़ा हिस्सा कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल होता है। सिंचाई के लिए भूजल और सतही जल पर अत्यधिक निर्भरता ने कई राज्यों में जल संसाधनों पर दबाव बढ़ा दिया है। दूसरी तरफ देश में तेजी से बढ़ रही डिजिटल अर्थव्यवस्था भी नई चुनौती बनकर सामने आई है। डेटा सेंटर, क्लाउड सर्विस, सेमीकंडक्टर यूनिट और AI आधारित तकनीकों को संचालित करने के लिए बड़ी मात्रा में पानी की जरूरत पड़ती है। सर्वर को ठंडा रखने और तकनीकी प्रक्रियाओं में इस्तेमाल होने वाला पानी भविष्य में जल खपत को और बढ़ा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पानी की बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति के बीच संतुलन बनाना भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।
भूजल दोहन, खराब वितरण व्यवस्था और जलवायु परिवर्तन बने बड़ी समस्या
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत के कई राज्यों में भूजल का स्तर लगातार गिर रहा है। अनियोजित दोहन और वर्षा जल के पर्याप्त संरक्षण की कमी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। इसके अलावा राज्यों की अलग-अलग जल नीतियां और संसाधनों के बंटवारे की धीमी प्रक्रिया भी प्रभावी जल प्रबंधन में बाधा बन रही है। जलवायु परिवर्तन के कारण सूखा, बाढ़ और अनियमित मानसून जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे जल स्रोतों की स्थिरता प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में पानी केवल पर्यावरणीय नहीं बल्कि आर्थिक और विकास से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन सकता है।
दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे शहरों पर सबसे ज्यादा दबाव
देश के बड़े महानगरों में जल संकट के संकेत पहले से दिखाई देने लगे हैं। मुंबई के जलाशयों में पानी का भंडार सामान्य स्तर से नीचे पहुंच चुका है, जबकि दिल्ली के कई इलाकों में लोग लंबे समय से अनियमित जलापूर्ति की शिकायत कर रहे हैं। चेन्नई ने पिछले वर्षों में गंभीर जल संकट का सामना किया था और फिलहाल स्थिति नियंत्रित होने के बावजूद भूजल स्तर गिरने की चिंता बनी हुई है। मूडीज का मानना है कि इन शहरों में बढ़ती आबादी और उद्योगों की जरूरतों को देखते हुए जल संरक्षण, पुनर्चक्रण, वर्षा जल संचयन और आधुनिक वितरण प्रणाली पर तत्काल निवेश की जरूरत है। रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि यदि जल संसाधनों का टिकाऊ और वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन नहीं किया गया, तो आने वाले समय में भारत के कई शहरों को पानी की भारी कमी का सामना करना पड़ सकता है।
