अमेरिका अपने डिफेंस के लिए पैट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर और THAAD मिसाइल इंटरसेप्टर पर बहुत निर्भर है। लेकिन ईरान जंग के बाद से इनके मौजूदा भंडार लगभग आधे हो गए हैं। ईरान जंग का कोई अंत नहीं दिख रहा और अगर किसी दूसरे मोर्चे पर युद्ध छिड़ गया तो अमेरिका की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
US Missile Stock: चीन-नॉर्थ कोरिया का दिमाग घूम गया तो क्या करेगा अमेरिका? ईरान जंग में आधा हुआ अमेरिका का मिसाइल भंडार!Source : NDTV.com
क्या अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आधे हथियारों के साथ ईरान जंग जीतने का सपना देख रहे हैं... अगर अभी चीन या नॉर्थ कोरिया के साथ तनाव बढ़ गया तो अमेरिका की सेना क्या करेगी... क्या सब भगवान भरोसे चल रहा है... एक ऐसी जानकारी सामने आई है जो अमेरिकी जनता की चिंता बढ़ा सकती है। ईरान के साथ अमेरिका की जंग पांचवें महीने में पहुंच चुकी है और सच्चाई यह है कि अमेरिकी सेना के मुख्य एयर डिफेंस मिसाइलों का भंडार काफी कम हो गया है। इससे अमेरिकी सेना की इस क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या वह मिडिल ईस्ट में अपने ऑपरेशन जारी रखते हुए दूसरे क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर पाएगी?
क्या कहती है नई रिपोर्ट?
थिंक टैंक 'सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज' (CSIS) के एक आकलन से पता चला है कि फरवरी के अंत में जंग शुरू होने के बाद से अमेरिका ने बड़ी संख्या में पैट्रियट और टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) इंटरसेप्टर तैनात किए हैं, जिससे उसके रिजर्व स्टॉक में भारी कमी आई है। CSIS के अनुमान के मुताबिक, जंग शुरू होने से पहले अमेरिका के पास अपने दो सबसे एडवांस मॉडलों में लगभग 2,200 पैट्रियट इंटरसेप्टर और करीब 452 THAAD मिसाइलें थीं। लेकिन अब मौजूदा भंडार घटकर 827 से कम पैट्रियट इंटरसेप्टर और 278 से कम THAAD बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर रह गया है।
भंडार घटने से बढ़ सकता है जोखिम
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि मिसाइल भंडार में कमी अमेरिका और उसके सहयोगियों को एयर डिफेंस मिशन के दौरान ज्यादा ऑपरेशनल जोखिम उठाने के लिए मजबूर कर सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है, "भंडार कम होने से अमेरिका और उसके गठबंधन सहयोगियों को इंटरसेप्शन (मिसाइल को हवा में नष्ट करने) के मामले में अधिक जोखिम उठाना पड़ सकता है। बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस के लिए पैट्रियट और THAAD का कोई प्रभावी विकल्प नहीं है।"
थिंक टैंक ने इस बात पर भी जोर दिया कि आम मिसाइलों से लैस अमेरिकी नौसेना के जहाज अक्सर इतनी दूर तैनात किए जाते हैं कि वे आने वाले मिसाइल हमलों के खिलाफ भरोसेमंद सुरक्षा नहीं दे पाते।
ट्रंप के दावे से अलग तस्वीर
ये निष्कर्ष राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों से अलग हैं। ट्रंप ने हथियारों के भंडार में कमी को लेकर जताई गई चिंताओं को खारिज करते हुए कहा था कि अमेरिका का भंडार बहुत अच्छी स्थिति में है। हालांकि अमेरिका-ईरान संघर्ष बिना किसी स्पष्ट समाधान के जारी है और ऐसे में हथियारों के घटते भंडार का मुद्दा बेहद संवेदनशील बन गया है। जानकारों का कहना है कि अगर यह टकराव लंबा खिंचता है तो अमेरिका के लिए दूसरे क्षेत्रों में आपात स्थिति से निपटना मुश्किल हो सकता है।
CNN की रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले अमेरिका के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने ट्रंप के साथ एक ब्रीफिंग में मिसाइल सप्लाई कम होने पर चिंता जताई थी। इस दौरान रक्षा अधिकारियों ने ईरान के साथ बड़े संघर्ष के खतरों पर विस्तार से जानकारी दी थी। उस चर्चा के बाद ट्रंप ने ईरान पर सैन्य हमलों को कुछ समय के लिए रोकने का आदेश दिया था, लेकिन इलाके में तनाव फिर बढ़ गया। ईरान के हमले के बाद अमेरिकी सेना ने जवाबी कार्रवाई की। इसके अलावा हाल के दिनों में अमेरिकी और सऊदी सेनाओं ने इराक में ईरान समर्थित गुटों को निशाना बनाते हुए संयुक्त हवाई हमले भी किए हैं।
चीन-नॉर्थ कोरिया पर भी चिंता
CSIS रिपोर्ट के सह-लेखक और रिटायर्ड मरीन कॉर्प्स कर्नल मार्क कैंसियन ने चेतावनी दी कि लगातार युद्ध से अमेरिकी मिसाइल भंडार इतने कम हो सकते हैं कि मिडिल ईस्ट के बाहर रक्षा तैयारियों पर असर पड़ सकता है। कैंसियन ने CNN से कहा कि ईरान के साथ लंबे युद्ध की स्थिति में चीन या नॉर्थ कोरिया से जुड़ी संभावित आपात स्थितियों का प्रभावी ढंग से सामना करने की अमेरिकी सेना की क्षमता भी कमजोर हो सकती है।
