जब भी खूबसूरत वादियों, बर्फ से ढकी चोटियों और ठंडी हवाओं का जिक्र होता है, तो अक्सर भारतीय पर्यटकों के दिमाग में सबसे पहला नाम स्विट्जरलैंड, मनाली या शिमला का आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के उत्तर-पूर्व (North-East) में छिपे कुछ ऐसे रत्न हैं, जिनकी खूबसूरती के आगे विदेशी नजारे भी कमतर नजर आते हैं?
हम बात कर रहे हैं अरुणाचल प्रदेश के तवांग (Tawang) और मेघालय की राजधानी शिलांग (Shillong) की। हालिया पर्यटन आंकड़ों और ट्रैवलर ट्रेंड्स के अनुसार, इस साल गर्मियों और आगामी मानसून सीजन में ऑफबीट और प्राकृतिक रूप से समृद्ध इन दोनों जगहों पर पर्यटकों की आमद में भारी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। आइए ग्राउंड रिसर्च के साथ जानते हैं कि आखिर क्यों इन दो हिल स्टेशन्स को 'धरती का स्वर्ग' कहा जा रहा है।
समुद्र तल से लगभग 10,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित तवांग, अरुणाचल प्रदेश का एक ऐसा हिस्सा है जो अपनी रहस्यमयी खूबसूरती और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है।
मेघालय की गोद में बसा शिलांग अपने सुहावने मौसम, हरी-भरी पहाड़ियों और पाइन (चीड़) के जंगलों के कारण ब्रिटिश काल से ही 'स्कॉटलैंड ऑफ द ईस्ट' के नाम से मशहूर है।
टूरिज्म एक्सपर्ट्स के मुताबिक, स्विट्जरलैंड या अन्य यूरोपीय देशों की यात्रा जहां जेब पर भारी पड़ती है और वीजा की औपचारिकताएं होती हैं, वहीं उत्तर-पूर्व भारत का यह कोना बजट-फ्रेंडली होने के साथ-साथ आपको अनछुए प्राकृतिक नजारे (Untouched Nature) प्रदान करता है। तवांग की बर्फीली शांति और शिलांग की मखमली हरियाली मिलकर पर्यटकों को एक ऐसा 'जन्नत' जैसा एहसास देती हैं, जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।
यदि आप भी भीड़भाड़ वाले कमर्शियल हिल स्टेशनों से दूर एक शांत और तरोताजा करने वाली यात्रा की तलाश में हैं, तो इस साल नॉर्थ-ईस्ट के इन रत्नों को अपनी बकेट लिस्ट में जरूर शामिल करें।
