उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की सहायक अभियोजन अधिकारी (APO) मुख्य परीक्षा 28 जून 2026 से शुरू होने जा रही है। परीक्षा से ठीक पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अभ्यर्थी को बड़ी राहत देते हुए आयोग को 24 घंटे के भीतर आवेदन का सत्यापन कर एडमिट कार्ड जारी करने का निर्देश दिया है। कोर्ट के इस फैसले को तकनीकी कारणों से आवेदन निरस्त होने वाले अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


क्या है पूरा मामला?

मामला अभ्यर्थी लवली से जुड़ा है, जिनका आवेदन यूपीपीएससी ने यह कहते हुए निरस्त कर दिया था कि ऑनलाइन आवेदन का प्रिंटआउट जमा नहीं किया गया। जबकि अभ्यर्थी की ओर से दावा किया गया कि निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज आयोग को भेज दिए गए थे और ट्रैकिंग रिपोर्ट के अनुसार वे आयोग के कार्यालय में प्राप्त भी हो चुके थे।


हाईकोर्ट ने दिया बड़ा आदेश

मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने प्रथम दृष्टया अभ्यर्थी की दलीलों को उचित माना। अदालत ने आयोग को निर्देश दिया कि 24 घंटे के भीतर ऑनलाइन आवेदन का सत्यापन किया जाए। यदि आवेदन सही पाया जाता है तो किसी नई हार्ड कॉपी की मांग किए बिना अभ्यर्थी को मुख्य परीक्षा का एडमिट कार्ड जारी किया जाए, ताकि वह 28 जून से होने वाली परीक्षा में शामिल हो सके।


परिणाम पर रहेगा आयोग का अधिकार

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने का अर्थ अंतिम चयन नहीं है। अभ्यर्थी के परीक्षा परिणाम की घोषणा का अधिकार उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के पास ही रहेगा। आवश्यकता पड़ने पर आयोग परिणाम को सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष भी प्रस्तुत कर सकता है।


राज्य सरकार से मांगा जवाब

अदालत ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है।


28 जून से होगी UPPSC APO मुख्य परीक्षा

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की सहायक अभियोजन अधिकारी (APO) मुख्य परीक्षा 28 जून 2026 से आयोजित होगी। ऐसे में हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद संबंधित अभ्यर्थी को परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिल गया है। आयोग अब अदालत के निर्देशानुसार आवेदन का सत्यापन कर आगे की प्रक्रिया पूरी करेगा।


फैसले का महत्व

विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश उन अभ्यर्थियों के लिए भी महत्वपूर्ण है जिनके आवेदन तकनीकी या दस्तावेज संबंधी कारणों से विवादों में फंस जाते हैं। अदालत ने संकेत दिया है कि यदि उम्मीदवार ने समय पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की है, तो केवल तकनीकी आधार पर उसे परीक्षा से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।