
यूपी पंचायत चुनाव में देरी पर सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट।Source : Chrome
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव समय पर न होने के मामले पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने चुनाव प्रक्रिया में हुई देरी पर चिंता जताते हुए राज्य सरकार से पूरा रिकॉर्ड तलब किया है। साथ ही कहा है कि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए चुनाव की तैयारियां काफी पहले शुरू की जानी चाहिए।
चुनाव में देरी पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने पंचायत चुनाव समय पर न कराने के मुद्दे पर सुनवाई करते हुए कहा कि स्थानीय निकायों के चुनाव संविधान के तय प्रावधानों के अनुसार समय पर कराना सरकार की जिम्मेदारी है। अदालत ने संकेत दिया कि चुनाव में हुई देरी के कारणों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी।
सरकार से तलब किया गया रिकॉर्ड
खंडपीठ ने राज्य सरकार को चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सभी दस्तावेज़ और रिकॉर्ड प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अदालत यह जानना चाहती है कि देरी किन परिस्थितियों में हुई और क्या यह प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम थी या फिर सरकार के नियंत्रण से बाहर की वजहों से ऐसा हुआ।
दो साल पहले शुरू हों चुनाव की तैयारियां
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि भविष्य में निर्वाचित पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने से कम से कम दो वर्ष पहले चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी जानी चाहिए। इससे समय पर चुनाव कराना आसान होगा और संवैधानिक व्यवस्था प्रभावित नहीं होगी।
11 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त 2026 तय की गई है। तब तक राज्य सरकार को चुनाव प्रक्रिया से जुड़े आवश्यक रिकॉर्ड अदालत के सामने पेश करने होंगे। इसके बाद कोर्ट यह तय करेगा कि देरी के लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है।
गिरफ्तारी को लेकर भी कोर्ट की टिप्पणी
इसी दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट की एक अन्य पीठ ने पुलिस की गिरफ्तारी प्रक्रिया पर भी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि कई मामलों में पुलिस संदिग्धों को पहले से ही दोषी मानकर कार्रवाई करती है, जबकि जांच और गिरफ्तारी के दौरान संवैधानिक प्रावधानों का पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए।
