लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में राज्य में करीब 26 हजार स्कूल बंद हो गए हैं। अखिलेश ने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत होती है और स्कूलों के बंद होने से सबसे ज्यादा नुकसान गरीब और ग्रामीण इलाकों के बच्चों को होता है।

अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा कि अगर सरकारी स्कूलों की संख्या लगातार कम होती जाएगी, तो लाखों बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी। उनका कहना था कि सरकार को नए स्कूल खोलने और मौजूदा स्कूलों को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए, न कि उन्हें बंद करने पर।

सपा प्रमुख ने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय सरकार दूसरी प्राथमिकताओं पर ज्यादा ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवार अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में सरकारी स्कूल ही उनके लिए सबसे बड़ा सहारा हैं।

अखिलेश यादव के बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में शिक्षा का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। विपक्ष इस मुद्दे को विधानसभा और जनता के बीच उठाने की तैयारी कर रहा है।

वहीं, राज्य सरकार का कहना है कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं। सरकार की ओर से पहले भी कहा गया है कि स्कूलों का विलय (Merger) छात्रों की संख्या, संसाधनों के बेहतर उपयोग और शिक्षा की गुणवत्ता को ध्यान में रखकर किया जाता है। सरकार का दावा है कि इसका उद्देश्य बच्चों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि स्कूलों के बंद होने और विलय को लेकर सरकार और विपक्ष के अपने-अपने तर्क हैं। ऐसे मामलों में वास्तविक स्थिति का आकलन सरकारी आंकड़ों और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

सोशल मीडिया पर भी अखिलेश यादव के बयान को लेकर बहस छिड़ गई है। कुछ लोग उनके दावे का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कई लोग सरकार की नीतियों का पक्ष रख रहे हैं। शिक्षा का मुद्दा हमेशा से राजनीति का अहम विषय रहा है और आने वाले समय में इस पर और चर्चा होने की संभावना है।

फिलहाल, अखिलेश यादव के दावे पर सरकार की ओर से इस विशेष बयान के संबंध में विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह राजनीतिक बयान और सरकारी नीतियों के बीच बहस का विषय बना हुआ है।