लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति तैयार करने में जुटी है। इसी बीच एटा और कासगंज के पार्टी पदाधिकारियों की एक बैठक में उस समय माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया, जब सपा के दो नेता आपस में तीखी बहस करने लगे। बताया जा रहा है कि विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों नेताओं के बीच गाली-गलौज तक की नौबत आ गई। खास बात यह रही कि उस समय सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी बैठक में मौजूद थे।
ererSource : erer
बैठक में शुरू हुई बहस, देखते ही देखते बढ़ा विवाद
जानकारी के अनुसार विधानसभा चुनाव की तैयारियों और संगठन की स्थिति पर चर्चा के लिए एटा और कासगंज के करीब 25 पदाधिकारियों की बैठक बुलाई गई थी। अखिलेश यादव करीब दोपहर 12 बजे बैठक में पहुंचे। इसी दौरान मंजीत यादव पार्टी की पिछली स्थिति और चुनावी हार के कारणों पर अपनी बात रख रहे थे। तभी एटा जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष योगेंद्र सिंह यादव ने भी अपनी बात रखने की कोशिश की।
बताया गया कि मंजीत यादव ने योगेंद्र यादव की टिप्पणी पर आपत्ति जताई। इसके बाद दोनों के बीच बहस शुरू हो गई। कुछ ही देर में बातचीत का स्वर तेज हो गया और बैठक का माहौल असहज हो गया। मौजूद नेताओं ने दोनों को शांत कराने का प्रयास किया।
अखिलेश के सामने गाली-गलौज का दावा
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, विवाद के दौरान दोनों नेताओं के बीच कथित तौर पर गाली-गलौज भी हुई। मामला बढ़ता देखकर बैठक में मौजूद अन्य पदाधिकारियों ने हस्तक्षेप किया। अखिलेश यादव ने भी नेताओं को पार्टी अनुशासन में रहने की नसीहत दी।
रिपोर्टों के अनुसार अखिलेश यादव ने इस घटनाक्रम पर नाराजगी जताते हुए नेताओं पर टिप्पणी भी की। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि कुछ लोगों में अधिक पैसा आने के बाद वे अपनी मर्जी से काम करने लगते हैं। इसके बाद अखिलेश यादव बैठक को बीच में ही छोड़कर चले गए।
एक घंटे के भीतर संगठन पर बड़ी कार्रवाई
बैठक में हुए विवाद के बाद समाजवादी पार्टी ने तेजी से संगठनात्मक कार्रवाई की। करीब एक घंटे के भीतर एटा और कासगंज की जिला इकाइयों को भंग कर दिया गया। दोनों जिलों के जिलाध्यक्षों को भी पद से हटा दिया गया।
इसके साथ ही प्रदेश कार्यकारिणी में शामिल एटा और कासगंज के कुछ पदाधिकारियों को भी हटाए जाने की जानकारी सामने आई है। पार्टी की इस कार्रवाई को बैठक में हुए विवाद के बाद उठाए गए बड़े संगठनात्मक कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
दोनों नेताओं ने जताया खेद
घटना के बाद योगेंद्र सिंह यादव और मंजीत यादव की ओर से माफी मांगने की बात सामने आई है। दोनों नेताओं ने खुद को समाजवादी पार्टी का अनुशासित कार्यकर्ता बताते हुए पार्टी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई।
इस पूरे घटनाक्रम ने चुनावी तैयारियों के बीच पार्टी के स्थानीय संगठन में चल रहे मतभेदों को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है। हालांकि विवाद के पीछे की परिस्थितियों और नेताओं के बीच मतभेद की पूरी वजह को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।
एटा और कासगंज की राजनीतिक स्थिति भी चर्चा में
एटा में विधानसभा की चारों सीटों पर फिलहाल भाजपा का कब्जा बताया गया है। वहीं कासगंज में समाजवादी पार्टी की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत है और यहां की चार विधानसभा सीटों में से तीन पर सपा का कब्जा बताया गया है।
ऐसे समय में जब पार्टी विधानसभा चुनाव की रणनीति तैयार कर रही है, दोनों जिलों की इकाइयों को भंग करने का फैसला संगठन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में हुई कहासुनी से शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते पार्टी की जिला इकाइयों में बड़े बदलाव की वजह बन गया।
