लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पश्चिमी यूपी की शामली विधानसभा सीट भी उन सीटों में शामिल है, जहां आने वाले चुनाव में गठबंधन के बीच सीट बंटवारे को लेकर दिलचस्प तस्वीर देखने को मिल सकती है। खास बात यह है कि कांग्रेस अगर इस सीट पर अपनी दावेदारी मजबूत करती है, तो समाजवादी पार्टी के लिए भी समीकरण बदल सकते हैं।

शामली विधानसभा सीट कैराना लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। फिलहाल यहां राष्ट्रीय लोकदल के प्रसन्न कुमार विधायक हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा और आरएलडी ने गठबंधन करके चुनाव लड़ा था और शामली सीट आरएलडी के खाते में गई थी। आरएलडी के प्रसन्न चौधरी ने बीजेपी के तेजेंद्र सिंह को 7,107 वोटों से हराया था।

अब 2027 के चुनाव से पहले इस सीट को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ रही है। सपा पहले ही शामली को अपनी कमजोर सीटों में शामिल करके यहां संगठन मजबूत करने की कोशिश कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी ने उन 108 विधानसभा क्षेत्रों पर खास ध्यान दिया है, जहां पिछले चुनावों में उसे लगातार नुकसान हुआ है। शामली भी उनमें शामिल है।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। कांग्रेस भी यूपी में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सीटों को लेकर अपनी रणनीति बना रही है। पार्टी उन सीटों पर दावेदारी जता सकती है, जहां उसका प्रदर्शन दूसरे नंबर पर रहा था। शामली का नाम भी ऐसी सीटों में शामिल है। यही वजह है कि यहां सपा और कांग्रेस के बीच सीट को लेकर खींचतान की संभावना पर चर्चा शुरू हो गई है।

अब अगर 2022 के आंकड़ों पर नजर डालें तो कांग्रेस की स्थिति शामली में काफी कमजोर रही थी। कांग्रेस प्रत्याशी मोहम्मद अयूब जंग को उस चुनाव में सिर्फ 780 वोट मिले थे। यहां तक कि नोटा को भी कांग्रेस से ज्यादा 799 वोट मिले थे। इसके मुकाबले सपा-आरएलडी गठबंधन को 1,03,070 वोट और बीजेपी को 95,963 वोट मिले थे।

यानी सिर्फ वोटों के आंकड़ों के आधार पर देखें तो कांग्रेस के लिए शामली पर मजबूत दावा करना आसान नहीं होगा। लेकिन चुनावी राजनीति सिर्फ पुराने आंकड़ों से तय नहीं होती। गठबंधन, उम्मीदवार, स्थानीय समीकरण और पार्टी की जमीन पर सक्रियता भी काफी मायने रखती है।

शामली में जाट और मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी भूमिका मानी जाती है। इसके अलावा वैश्य, कश्यप, एससी, ब्राह्मण और गुर्जर मतदाता भी चुनावी समीकरण में महत्वपूर्ण हैं। यही वजह है कि हर पार्टी इस सीट पर अपने हिसाब से सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश कर रही है।

दिलचस्प बात यह भी है कि बीजेपी और आरएलडी अब गठबंधन में हैं। शामली में आरएलडी का मौजूदा विधायक है, इसलिए दोनों दलों के बीच भी सीट बंटवारे को लेकर दावेदारी अहम होगी। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक शामली और थानाभवन सीट पर आरएलडी की दावेदारी बनी हुई है।

ऐसे में 2027 से पहले शामली की राजनीति में कई सवाल हैं। क्या सीट आरएलडी के पास रहेगी? क्या सपा अपने पुराने गठबंधन समीकरण से अलग यहां खुद मैदान में उतरेगी? या कांग्रेस सीट पर अपना दावा पेश करके INDIA गठबंधन के भीतर नया पेंच खड़ा करेगी?

फिलहाल इन सवालों का अंतिम जवाब सामने नहीं आया है। लेकिन इतना साफ है कि शामली सीट 2027 के चुनाव में पश्चिमी यूपी की उन सीटों में शामिल रहेगी, जिस पर सभी दलों की नजर रहेगी। सीट बंटवारे का फैसला होने के बाद ही साफ होगा कि यहां कौन किसके सामने मैदान में उतरता है।