मुंबई में आयोजित एक विशाल युवा रैली के दौरान शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने NEET पेपर लीक के खिलाफ देशभर में चल रहे छात्र आंदोलन की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर से उठी यह आवाज सिर्फ एक परीक्षा या एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के युवाओं की ताकत और लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक बन चुकी है। उद्धव ठाकरे ने दावा किया कि यह आंदोलन भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ एक बड़े राजनीतिक संघर्ष की शुरुआत है।
Uddhav Thackeray on CJP Protest: 'युवाओं ने नया इतिहास लिखा', जंतर-मंतर आंदोलन को बताया बीजेपी के खिलाफ बड़ी लड़ाई की शुरुआतSource : GoogleSource : Hindustan times.com
युवाओं की एकजुटता को बताया लोकतंत्र की ताकत
शिवाजी पार्क में आयोजित 'तिरंगा रैली' को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि देश के युवाओं ने साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में जनता की ताकत सबसे बड़ी होती है। उन्होंने कहा, "वोट चोरी किए जा सकते हैं, लेकिन लोगों की आवाज और उनकी एकजुटता को कोई नहीं चुरा सकता।" ठाकरे ने प्रदर्शन में शामिल छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने अपने संघर्ष से देश में एक नया अध्याय लिख दिया है और यह आने वाले समय की राजनीति को भी नई दिशा देगा।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को बताया बड़ा संदेश
उद्धव ठाकरे ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन की बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह फैसला दिखाता है कि जब युवा एकजुट होकर अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से रखते हैं तो सरकार को भी उनकी आवाज सुननी पड़ती है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक इस्तीफा नहीं, बल्कि जवाबदेही की मांग कर रहे युवाओं की ताकत का प्रतीक है।
मोदी सरकार पर साधा निशाना
अपने संबोधन में उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार को राजनीतिक जोड़-तोड़ और विपक्षी दलों को कमजोर करने की रणनीति में समय बिताने के बजाय देश की शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य पर ध्यान देना चाहिए। उनके मुताबिक बार-बार होने वाले पेपर लीक ने लाखों छात्रों के सपनों को प्रभावित किया है और अब इस व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत है।
छात्र आंदोलन को बताया बदलाव की शुरुआत
ठाकरे ने कहा कि जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह आंदोलन केवल NEET पेपर लीक तक सीमित नहीं रहेगा। उनके अनुसार यह देश में जवाबदेही, पारदर्शिता और बेहतर शिक्षा व्यवस्था की मांग का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने आंदोलन की ऊर्जा और एकता को बनाए रखें तथा लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करते रहें।
देशभर में बढ़ा आंदोलन का दायरा
NEET पेपर लीक विवाद के बाद दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब कई राज्यों तक फैल चुका है। विभिन्न विपक्षी दलों ने भी छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन किए हैं। हाल के दिनों में संसद से लेकर सड़कों तक इस मुद्दे पर लगातार विरोध देखने को मिला, जबकि कई राजनीतिक नेताओं ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग उठाई है।
आगे क्या होगा, इस पर नजर
उद्धव ठाकरे के इस बयान के बाद छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। एक ओर विपक्ष इसे युवाओं की लोकतांत्रिक जीत बता रहा है, तो दूसरी ओर सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार के अपने कदमों का हवाला दे रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि शिक्षा सुधार और परीक्षा प्रणाली को लेकर केंद्र सरकार आगे क्या फैसले लेती है और छात्र संगठनों की अगली रणनीति क्या रहती है।
