ere | Source: ereआज रणवीर सिंह हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के चर्चित अभिनेताओं में गिने जाते हैं। बड़े पर्दे पर अलग-अलग किरदारों में खुद को ढालने वाले रणवीर की सफलता के पीछे लंबे संघर्ष की कहानी भी जुड़ी है। फिल्मों में कदम रखने से पहले उन्होंने करीब साढ़े तीन साल तक ऑडिशन दिए और कई बार रिजेक्शन का सामना किया। एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें लगा कि शायद उनका अभिनेता बनने का सपना पूरा नहीं हो पाएगा।

लेकिन उन्होंने उस दौर को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। लगातार कोशिश, मेहनत और अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखने के बाद रणवीर सिंह ने 2010 में फिल्मी दुनिया में डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने ‘गली बॉय’, ‘पद्मावत’ और ‘बाजीराव मस्तानी’ जैसी फिल्मों में अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर अपनी पहचान बनाई।

जब ऑडिशन के दौर में टूटने लगे थे रणवीर

फिल्मों में आने से पहले रणवीर सिंह मुंबई में काम की तलाश में स्टूडियो और ऑडिशन के चक्कर लगाते थे। कई बार कोशिश के बावजूद उन्हें सफलता नहीं मिली। लगातार रिजेक्शन का असर इतना हुआ कि एक समय उन्होंने अपनी मां के सामने अपनी भावनाएं जाहिर कीं और कहा कि उन्हें लगने लगा है कि शायद उनका सपना कभी पूरा नहीं होगा।

इसके बावजूद उन्होंने कोशिश बंद नहीं की। धीरे-धीरे उन्हें फिल्मों में अवसर मिले और उन्होंने हर भूमिका को पूरी मेहनत के साथ निभाने की कोशिश की।

पिता की एक बात ने मुश्किल समय में दिया सहारा

रणवीर सिंह ने एक अवॉर्ड समारोह के दौरान अपने पिता से मिले सहयोग को याद किया था। उन्होंने बताया था कि एक समय उन्हें पोर्टफोलियो तैयार कराने के लिए करीब 50 हजार रुपये की जरूरत थी और वह इसे लेकर परेशान थे।

तब उनके पिता ने उन्हें भरोसा देते हुए कहा था, “फिक्र मत कर बेटा, तेरा पापा अभी बैठा है यहां।” रणवीर के मुताबिक, संघर्ष के दिनों में परिवार का यह भरोसा उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण था।

‘हर किसी की अपनी लड़ाई होती है’

एक इंटरव्यू के दौरान रणवीर सिंह ने जिंदगी की मुश्किलों को लेकर भी अपनी बात रखी थी। उनका कहना था कि हर व्यक्ति अपनी अलग लड़ाई लड़ रहा है। हर कोई अपनी परेशानियों के बारे में खुलकर बात नहीं कर सकता और न ही हर व्यक्ति अपनी निजी समस्याएं सार्वजनिक करना चाहता है।

उनकी यह बात इस सोच को सामने रखती है कि किसी व्यक्ति की बाहरी जिंदगी देखकर उसके संघर्ष का अंदाजा लगाना आसान नहीं होता।

‘अगर मैं कर सकता हूं तो आप क्यों नहीं’

रणवीर सिंह ने एक सार्वजनिक बातचीत में लोगों को अपने सपनों को लेकर सीमाएं तय नहीं करने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा था कि यह नहीं सोचना चाहिए कि कोई चीज आपकी पहुंच से बाहर है।

उन्होंने अपनी यात्रा का उदाहरण देते हुए कहा था कि अगर वह अपने लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं तो दूसरे लोग भी अपने सपनों के लिए प्रयास कर सकते हैं। उनके मुताबिक, व्यक्ति को अपनी किस्मत बनाने के लिए खुद प्रयास करते रहना चाहिए।

काम की पहचान मिलने के बाद बढ़ता है आत्मविश्वास

रणवीर ने यह भी कहा है कि जब किसी व्यक्ति के काम को पहचान मिलने लगती है और लोग उसके काम को महत्व देने लगते हैं, तो आत्मविश्वास स्वाभाविक रूप से बढ़ता है।

उनकी इस सोच के मुताबिक सफलता केवल उपलब्धि का नाम नहीं है, बल्कि अपने काम के प्रति भरोसा बढ़ने का भी एक जरिया है।

माता-पिता के समर्थन को कभी नहीं भूले रणवीर

एक अवॉर्ड लेते समय रणवीर सिंह ने अपने माता-पिता के सहयोग को याद किया था। उन्होंने कहा था कि उनके माता-पिता ने हमेशा उन्हें अपने सपनों को जीने का हौसला दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि वह और उनका परिवार कितनी मेहनत से इस मुकाम तक पहुंचे हैं, यह भगवान ही जानते हैं। रणवीर के लिए परिवार का भरोसा उनके संघर्ष के दौर की महत्वपूर्ण ताकतों में से एक रहा।

फोकस और मेहनत को बताया सफलता का रास्ता

रणवीर सिंह का कहना है कि उन्होंने अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखा और मेहनत जारी रखी। उनके मुताबिक, कई बार लोगों को यह लगता है कि उनकी चाहत की चीज संभव नहीं है, लेकिन लगातार प्रयास करने से परिस्थितियां बदली जा सकती हैं।

उनकी कहानी में भी यही नजर आता है कि शुरुआती रिजेक्शन के बावजूद उन्होंने अभिनेता बनने के लक्ष्य से खुद को अलग नहीं किया।

सिर्फ पैसा और प्रसिद्धि के लिए न करें काम

सफलता को लेकर रणवीर सिंह की एक और बात काफी महत्वपूर्ण है। उनका मानना है कि व्यक्ति को कोई काम सही वजह से करना चाहिए। केवल प्रसिद्धि और पैसे को लक्ष्य बनाकर काम करने के बजाय अपने काम के प्रति वास्तविक लगाव और उद्देश्य होना चाहिए।

उनकी इस सोच में करियर की लंबी यात्रा और अपने काम के प्रति प्रतिबद्धता को महत्व दिया गया है।

लोगों की राय के डर से अपनी पहचान न बदलें

रणवीर ने जजमेंट के डर को लेकर भी अपनी राय साझा की है। उनका मानना है कि दूसरे लोग क्या कहेंगे, इस डर से व्यक्ति को अपनी मौलिकता और अलग पहचान नहीं छोड़नी चाहिए।

उनके अनुसार अपनी विशिष्टता को बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि यही किसी व्यक्ति को दूसरों से अलग पहचान दिला सकती है।

बड़े जोखिम के साथ बड़ी संभावना भी

रणवीर सिंह जोखिम को भी सफलता की यात्रा का हिस्सा मानते हैं। उनका कहना है कि बड़ा जोखिम लेने पर बड़ा पुरस्कार मिलने की संभावना भी रहती है।

हालांकि इस रास्ते में गलतियां होना स्वाभाविक है। उनके मुताबिक असफलता को अंतिम परिणाम मानने के बजाय उससे मिलने वाली सीख पर ध्यान देना चाहिए।

लंबे करियर में टैलेंट और मेहनत की भूमिका

रणवीर सिंह ने अपने करियर में कई तरह के किरदार निभाए हैं। ‘पद्मावत’ में अलाउद्दीन खिलजी से लेकर ‘बाजीराव मस्तानी’ में पेशवा बाजीराव और ‘गली बॉय’ में मुराद जैसे किरदारों के जरिए उन्होंने अलग-अलग भूमिकाओं में अपनी अभिनय क्षमता दिखाई।

उनकी यात्रा का एक अहम पहलू यह भी है कि शुरुआती संघर्ष और रिजेक्शन के बाद उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में लगातार काम किया। उनके विचारों में मेहनत, फोकस, परिवार का समर्थन, अपनी मौलिकता और असफलताओं से सीखने जैसे पहलू बार-बार सामने आते हैं।

रणवीर सिंह की कहानी से क्या सीख मिलती है

रणवीर सिंह की संघर्ष यात्रा यह दिखाती है कि किसी भी करियर में शुरुआती असफलताएं अंतिम मंजिल तय नहीं करतीं। ऑडिशन में रिजेक्शन मिलने से लेकर फिल्मों में प्रमुख भूमिकाएं निभाने तक का उनका सफर कई उतार-चढ़ाव से गुजरा है।

उनके बताए विचारों का सार यही है कि अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखना, मेहनत करते रहना, परिवार और करीबियों के समर्थन को महत्व देना तथा दूसरों के निर्णय के डर से अपनी पहचान न बदलना सफलता की यात्रा में महत्वपूर्ण हो सकता है।