चेन्नई: तमिलनाडु सरकार राज्य के शराब बाजार में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। सरकार की योजना TASMAC दुकानों में अधिक विदेशी और प्रीमियम शराब ब्रांड्स को शामिल करने की है, ताकि ग्राहकों को ज्यादा विकल्प मिलें, राजस्व बढ़ाया जा सके और दूसरे राज्यों में होने वाले शराब कारोबार के कारण होने वाले नुकसान को रोका जा सके। इसके साथ ही एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोतरी और राजस्व रिसाव (Revenue Leakage) पर सख्ती भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। हाल के महीनों में TASMAC से जुड़े कथित राजस्व रिसाव और वित्तीय दबावों के बीच यह कदम काफी अहम माना जा रहा है।
The Tamil Nadu government may make a major change in the liquor market
ग्राहकों को ज्यादा विकल्प देने पर सरकार का जोर
तमिलनाडु सरकार का मानना है कि सीमित ब्रांड्स के कारण बड़ी संख्या में उपभोक्ता शराब खरीदने के लिए पुडुचेरी, बेंगलुरु और दूसरे राज्यों का रुख करते हैं। इससे राज्य को संभावित राजस्व का नुकसान होता है। इसी वजह से अगले कुछ महीनों में TASMAC दुकानों पर कई नए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स उपलब्ध कराने की योजना बनाई जा रही है। सरकार का दावा है कि इससे ग्राहकों को बेहतर विकल्प मिलेंगे और राज्य के भीतर ही बिक्री बढ़ेगी। TASMAC आउटलेट्स के स्वरूप और सुविधाओं में भी सुधार की तैयारी चल रही है ताकि उपभोक्ताओं को बेहतर अनुभव मिल सके।
राजस्व बढ़ाने के लिए एक्साइज और अतिरिक्त शुल्क पर फोकस
राज्य सरकार पहले ही शराब उद्योग से अतिरिक्त राजस्व जुटाने की दिशा में कदम बढ़ा चुकी है। हाल ही में शराब, बीयर और वाइन निर्माताओं पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का फैसला किया गया, जिससे सालाना सैकड़ों करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होने का अनुमान है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रीमियम और विदेशी ब्रांड्स की बिक्री बढ़ती है तो सरकार को प्रति बोतल अधिक टैक्स और मार्जिन मिलेगा। ऐसे में शराब कारोबार तमिलनाडु के लिए पहले से भी बड़ा राजस्व स्रोत बन सकता है। राज्य के वित्तीय दबावों को देखते हुए सरकार शराब क्षेत्र से अधिक कमाई की संभावनाएं तलाश रही है।
TASMAC में लीकेज रोकने की बड़ी मुहिम
सरकार का एक बड़ा लक्ष्य TASMAC नेटवर्क में कथित राजस्व रिसाव को रोकना भी है। हाल में सामने आई रिपोर्टों में दावा किया गया कि शराब बिक्री से जुड़ी रकम का एक हिस्सा सरकारी खजाने तक पहुंचने से पहले ही अनौपचारिक चैनलों में चला जाता था। नई व्यवस्था में निगरानी बढ़ाने, नकद लेनदेन पर नियंत्रण और बिक्री प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि यदि लीकेज पर प्रभावी रोक लग जाती है तो बिना टैक्स बढ़ाए भी राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी संभव है।
आर्थिक जरूरतों और राजनीतिक बहस के बीच नया मॉडल
तमिलनाडु लंबे समय से शराब बिक्री से होने वाली आय पर काफी हद तक निर्भर रहा है। हालांकि, शराब नीति हमेशा राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय रही है। एक ओर सरकार राजस्व बढ़ाने और वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए नए ब्रांड्स और प्रीमियम बिक्री मॉडल पर विचार कर रही है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक संगठनों का एक वर्ग शराब की उपलब्धता बढ़ाने पर सवाल भी उठा रहा है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार आर्थिक जरूरतों और सामाजिक चिंताओं के बीच किस तरह संतुलन बनाती है। फिलहाल संकेत साफ हैं कि तमिलनाडु का शराब बाजार बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है, जहां ग्लोबल ब्रांड्स की मौजूदगी पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा मजबूत हो सकती है।
