erer | Source: eerrहरिद्वार। हरिद्वार में इस वर्ष कांवड़ यात्रा ने आस्था और श्रद्धालुओं की संख्या का ऐसा रिकॉर्ड बनाया है, जिसने पिछले 40 वर्षों के सभी आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया। कांवड़ मेला प्रशासन के अनुसार, 13 दिनों की मेला अवधि में 4 करोड़ 80 लाख 40 हजार कांवड़िए हरकी पैड़ी समेत हरिद्वार के विभिन्न गंगा घाटों पर पहुंचे और गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्यों की ओर रवाना हुए। कांवड़ यात्रा के पिछले चार दशकों में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में शिवभक्त हरिद्वार पहुंचे हैं।

इस वर्ष कांवड़ियों की भारी भीड़ के कारण हरिद्वार की सड़कों, राजमार्गों, गंगा घाटों और कांवड़ पटरी पर लगातार श्रद्धालुओं का सैलाब नजर आया। देश के अलग-अलग राज्यों से शिवभक्त हरिद्वार पहुंचे। गंगा स्नान करने के बाद उन्होंने हरकी पैड़ी समेत विभिन्न घाटों से पवित्र गंगाजल भरा और अपने क्षेत्रों की ओर रवाना हुए। मंगलवार को कांवड़ियों ने अपने-अपने क्षेत्रों के शिवालयों में गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक किया।

पिछले साल से 28 लाख से अधिक कांवड़िए बढ़े

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में करीब 4 करोड़ 52 लाख कांवड़िए हरिद्वार पहुंचे थे। इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 4 करोड़ 80 लाख 40 हजार हो गई। यानी पिछले वर्ष की तुलना में इस बार करीब 28 लाख से अधिक शिवभक्त हरिद्वार पहुंचे। कांवड़ मेले में श्रद्धालुओं की संख्या हर साल बढ़ रही है और वर्ष 2026 में यह संख्या पिछले 40 वर्षों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई।

इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण पुलिस और प्रशासन के सामने भीड़ प्रबंधन, यातायात व्यवस्था और कांवड़ियों की सुरक्षा को लेकर बड़ी चुनौती रही। इसके बावजूद पुलिस और प्रशासन की ओर से व्यापक इंतजाम किए गए। कांवड़ मेला क्षेत्र में पुलिस बल लगातार ड्यूटी पर तैनात रहा।

एसएसपी ने बताया, 13 दिनों में पहुंचे 4.80 करोड़ शिवभक्त

हरिद्वार के एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि 13 दिनों में 4.80 करोड़ शिवभक्त हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने गंतव्यों के लिए रवाना हुए। उन्होंने बताया कि कांवड़ मेला अवधि के दौरान पुलिस बल लगातार ड्यूटी पर तैनात रहा। पुलिस और प्रशासन के संयुक्त प्रयास से कांवड़ मेले का सफल आयोजन किया गया।

कांवड़ियों की भारी संख्या के बीच हरिद्वार में लगातार यातायात का दबाव बना रहा। शहर और आसपास के राजमार्गों पर भी श्रद्धालुओं और कांवड़ वाहनों की आवाजाही बढ़ी रही। प्रशासन के लिए इतनी बड़ी भीड़ को सुरक्षित तरीके से संभालना महत्वपूर्ण चुनौती बनी रही।

1986 में चार लाख से शुरू हुआ आंकड़ा अब पहुंचा 4.80 करोड़

कांवड़ मेला प्रशासन की ओर से जारी वर्षवार आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले चार दशकों में कांवड़ियों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 1986 में करीब चार लाख कांवड़िए हरिद्वार पहुंचे थे। वर्ष 1990 में यह संख्या बढ़कर 10 लाख हो गई। वर्ष 1995 में करीब 50 लाख और वर्ष 2000 में कांवड़ियों की संख्या एक करोड़ तक पहुंच गई।

इसके बाद वर्ष 2018 में 3.76 करोड़, वर्ष 2019 में करीब 3.50 करोड़ और वर्ष 2022 में 3.80 करोड़ कांवड़िए हरिद्वार पहुंचे। वर्ष 2023 में करीब 4 करोड़, वर्ष 2024 में 4.14 करोड़ और वर्ष 2025 में 4.52 करोड़ कांवड़िए हरिद्वार पहुंचे थे। वर्ष 2026 में 4 करोड़ 80 लाख 40 हजार कांवड़ियों के पहुंचने के साथ नया रिकॉर्ड बन गया।

वर्ष 2020 में कांवड़ मेला स्थगित रहा था। इसके बाद वर्ष 2022 से फिर कांवड़ यात्रा शुरू हुई और श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2026 का आंकड़ा अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।

आस्था के सैलाब के बाद हरिद्वार में 7000 मीट्रिक टन कचरे की चुनौती

करोड़ों शिवभक्तों के हरिद्वार पहुंचने के साथ ही सफाई व्यवस्था पर भी भारी दबाव पड़ा। कांवड़ यात्रा के दौरान विभिन्न गंगा घाटों और मेला क्षेत्रों में करीब 7000 मीट्रिक टन कचरा जमा हुआ। नगर निगम की टीमें लगातार सफाई अभियान में जुटी हुई हैं और अब तक 5500 मीट्रिक टन से अधिक कचरा साफ किया जा चुका है।

कांवड़ यात्रा के शुरुआती चरण से ही नगर निगम की टीमें गंगा घाटों, कांवड़ पटरी और मेला क्षेत्र में नियमित रूप से कचरा उठाने का काम कर रही थीं। हालांकि यात्रा के अंतिम दो दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और वाहनों का दबाव काफी बढ़ गया। इस कारण नगर निगम के छोटे-बड़े कूड़ा उठाने वाले वाहनों को कांवड़ मेला क्षेत्र में प्रवेश करने में परेशानी हुई और कई जगह कचरा जमा हो गया।

भीड़ कम होते ही नगर निगम ने तेज किया सफाई अभियान

सोमवार देर रात कांवड़ियों की भीड़ कम होने के बाद नगर निगम की टीमों ने सफाई अभियान तेज कर दिया। हरकी पैड़ी से लेकर विभिन्न गंगा घाटों और कांवड़ पटरी तक सफाईकर्मी कचरा हटाने में जुट गए। नगर निगम की ओर से मेला क्षेत्र में जमा कचरे को हटाने का काम लगातार जारी है।

नगर आयुक्त नंदन कुमार ने बताया कि सोमवार देर रात से सफाई अभियान में तेजी लाई गई। हरकी पैड़ी से लेकर सभी गंगा घाटों और कांवड़ पटरी से दो दिनों में करीब 1500 मीट्रिक टन कचरा उठाया गया। उन्होंने बताया कि 30 जुलाई से 8 अगस्त तक नगर निगम की टीम ने करीब 5500 मीट्रिक टन कचरा उठाया था।

अंतिम दो दिनों में सबसे ज्यादा प्रभावित हुई सफाई व्यवस्था

कांवड़ यात्रा के शुरुआती दिनों में सफाई व्यवस्था लगातार संचालित होती रही। नगर निगम की टीमें नियमित अंतराल पर घाटों और कांवड़ पटरी से कचरा उठाती रहीं। लेकिन अंतिम दो दिनों में कांवड़ियों की संख्या और वाहनों का दबाव अत्यधिक बढ़ जाने के कारण कचरा उठाने वाले वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।

सोमवार देर रात श्रद्धालुओं की भीड़ कम होने के बाद सफाई वाहनों को मेला क्षेत्र में पहुंचने का अवसर मिला। इसके बाद नगर निगम ने घाटों और अन्य क्षेत्रों में जमा कचरे को हटाने का अभियान तेज कर दिया। निगम की टीमें लगातार सफाई कार्य में लगी हुई हैं।

40 साल का रिकॉर्ड टूटने के साथ बढ़ी सफाई की जिम्मेदारी

हरिद्वार में वर्ष 2026 की कांवड़ यात्रा ने श्रद्धालुओं की संख्या के मामले में नया इतिहास बनाया है। 13 दिनों में 4 करोड़ 80 लाख 40 हजार कांवड़ियों का पहुंचना पिछले 40 वर्षों का सबसे बड़ा आंकड़ा है। पिछले वर्ष की तुलना में करीब 28 लाख अधिक कांवड़ियों के आने से इस बार यात्रा का आकार और भी बड़ा रहा।

एक ओर पुलिस और प्रशासन ने करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाली, तो दूसरी ओर नगर निगम के सामने इतने बड़े धार्मिक आयोजन के बाद सफाई व्यवस्था को संभालने की चुनौती रही। करीब 7000 मीट्रिक टन कचरा जमा होने के बाद नगर निगम की टीमें अब तक 5500 मीट्रिक टन से अधिक कचरा साफ कर चुकी हैं।