ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच जारी राजनीतिक विवाद अब राहुल गांधी की स्कूबा डाइविंग तक पहुंच गया है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने दावा किया है कि राहुल गांधी की अंडमान में की गई स्कूबा डाइविंग पर 26 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इस बयान के बाद कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया है। दोनों दलों के बीच यह विवाद ग्रेट निकोबार परियोजना और पर्यावरणीय मुद्दों को लेकर लगातार गहराता जा रहा है।

Source : Kalamlok
राहुल गांधी ने उठाए थे पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों के सवाल
5 जून को राहुल गांधी ने एक वीडियो जारी कर बताया था कि वह भारत के सबसे दक्षिणी छोर इंदिरा पॉइंट पहुंचे और वहां मौजूद कोरल रीफ के बीच स्कूबा डाइविंग की। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के तहत आदिवासी समुदायों की जमीन 'वन अधिकार अधिनियम' का उल्लंघन कर ली जा रही है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि करीब 1.5 करोड़ पेड़ काटे जाने की योजना है और सरकारी नक्शों से कोरल रीफ को हटा दिया गया है। उनके अनुसार जिस क्षेत्र में यह परियोजना प्रस्तावित है, उसका आकार नई दिल्ली से लगभग चार गुना बड़ा है।
रिजिजू का दावा और कांग्रेस का पलटवार
20 जून को अंडमान में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने दावा किया कि राहुल गांधी की एक स्कूबा डाइविंग गतिविधि पर 26 करोड़ रुपये खर्च किए गए। उन्होंने कहा कि इस घटना को समुद्री जीवन और पर्यावरण से जोड़कर प्रचारित किया गया। रिजिजू ने आरोप लगाया कि इस तरह का प्रोपेगैंडा फैलाकर देश की प्रगति और भविष्य को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। इसके जवाब में 22 जून को कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर रिजिजू के बयान को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि यदि राहुल गांधी की स्कूबा डाइविंग पर 26 करोड़ रुपये खर्च हुए, तो क्या अब यह मान लिया जाए कि अंडमान में डाइविंग करने वाला हर पर्यटक करोड़ों रुपये खर्च करता है। टैगोर ने सवाल उठाया कि एक केंद्रीय मंत्री इस तरह की भ्रामक जानकारी क्यों फैला रहे हैं।
क्या है ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट?
भारत सरकार के अनुसार ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट लगभग 90 हजार करोड़ रुपये की बहुउद्देश्यीय परियोजना है। इसके तहत अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, एयरपोर्ट, बिजली संयंत्र और एक नए टाउनशिप के विकास की योजना है। सरकार का कहना है कि यह परियोजना भारत की समुद्री सुरक्षा, व्यापारिक क्षमता और इंडो-पैसिफिक रणनीति को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है। सरकार के मुताबिक ग्रेट निकोबार का स्थान मलक्का स्ट्रेट के बेहद करीब है, जो दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वर्तमान में भारत का बड़ा हिस्सा कंटेनर ट्रांसशिपमेंट सिंगापुर, कोलंबो और पोर्ट क्लांग जैसे विदेशी बंदरगाहों के माध्यम से होता है। सरकार चाहती है कि इस व्यापार का बड़ा हिस्सा भारत में स्थानांतरित हो, जिससे देश की आर्थिक और रणनीतिक स्थिति मजबूत हो सके।
